"बोगस कुणबी प्रमाणपत्र पेश करने वालों को मिले उम्रकैद की सजा", ओबीसी नेता बबनराव तायवाड़े की मांग
नागपुर: फर्जी दस्तावेजों के जरिए कुणबी (ओबीसी) प्रमाण पत्र हासिल करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि फर्जी कागजातों के आधार पर प्रमाणपत्र बनाने वाले और इसका दुरुपयोग करने वालों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा का प्रावधान होना चाहिए। तायवाड़े ने स्पष्ट किया कि बोगस प्रमाणपत्रों के कारण वास्तविक ओबीसी समाज के अधिकारों का बड़ा नुकसान हो रहा है, इसलिए सरकार को किसी भी स्थिति में 'सरसकट' (सामूहिक) ओबीसी प्रमाणपत्र जारी नहीं करने चाहिए।
"चुनाव से पहले ही पूरी हो जाति प्रमाण पत्र की स्क्रूटनी"
स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों में जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर बबनराव तायवाड़े ने एक अहम सुझाव दिया। उन्होंने कहा, "नामांकन दाखिल करने से पहले ही उम्मीदवार के सभी दस्तावेजों की पूरी तरह जांच और उसकी वैलिडीटी की जांच होनी चाहिए। चुनाव जीतने के बाद कास्ट वैलिडीटी जमा करने के लिए जो 6 महीने की छूट दी जाती है, उस नियम को तुरंत रद्द कर दिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि फर्जी कागजातों के कारण ही ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं, हालांकि वैलिडीटी देने वाले अधिकारी कई बार निष्पक्षता से काम करते हैं। इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर उम्रकैद की सजा का कानून बनाने की मांग करेंगे।
"ओबीसी कहने में कैसी शर्म? 'जय ओबीसी' आंदोलन से जुड़ें नेता"
समाज के नेतृत्व और नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तायवाड़े ने कहा कि आरक्षण और अन्य लाभ लेते समय तो लोग ओबीसी बनते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से ओबीसी कहने में कुछ लोग हिचकिचाते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार सहित सभी सामाजिक व राजनीतिक नेताओं को खुला आह्वान किया,"अगर विजय वडेट्टीवार या किसी भी नेता को लगता है कि उनके नेतृत्व में ओबीसी समाज का भला होना चाहिए, तो उन्हें खुलकर आगे आना चाहिए। अपने बैनरों पर 'जय ओबीसी' लिखकर सरकार के सामने समाज की जायज मांगें रखनी चाहिए। किसी को भी समाज को गुमराह नहीं करना चाहिए।"
"2 सितंबर के जीआर से कोई बोगस प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ"
सरकारी आदेश (GR) पर चल रहे विवाद को खारिज करते हुए तायवाड़े ने कहा कि 2 सितंबर के जीआर से ओबीसी समाज का कोई नुकसान नहीं हुआ है। जब उन्होंने यह बात रखी तो कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाए, लेकिन सच्चाई यह है कि इस जीआर के आधार पर कोई भी नया व्यक्ति ओबीसी में शामिल नहीं हुआ और न ही कोई बोगस प्रमाणपत्र बना। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को जनता के सामने सच रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से जातिगत जनगणना कराने और केंद्र में अलग से ओबीसी मंत्रालय गठित करने की मांग दोहराई।
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