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Wardha: बोर अभयारण्य बाघ हमला प्रकरण: ग्रामीणों की एकजुटता के आगे झुका प्रशासन! 53 लाख रुपये का मुआवजा


वर्धा: बोर अभयारण्य क्षेत्र के बफर जोन में आने वाले रायपुर जंगली गांव में बाघ के हमले में जान गंवाने वाले किसान भगवान धुर्वे के मामले में आखिरकार ग्रामीणों की अभूतपूर्व एकजुटता और आंदोलन की बड़ी जीत हुई है! पिछले छह दिनों से प्रशासन के खिलाफ चल रहे संघर्ष और परिजनों द्वारा शव लेने से इनकार करने के बाद, आखिरकार प्रशासन ने एक कदम पीछे हटते हुए 53 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और वन मजदूर के रूप में रोजगार देने का आश्वासन दिया है।

9 सितंबर को हमेशा की तरह खेत में काम करने के लिए गए भगवान धुर्वे पर अचानक झाड़ियों में छिपे पट्टेदार बाघ ने हमला कर दिया। इस भीषण हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे रायपुर जंगली गांव में आक्रोश की लहर दौड़ गई।

वन्यजीवों का बढ़ता आतंक, गाय-बकरियों पर हमले और अब सीधे एक किसान की गई जान... इन सबके चलते गुस्से में आए ग्रामीणों ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया। गांव के पुनर्वास, परिजनों को नौकरी या 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता अभ्युदय मेघे और सांसद अमर काळे आंदोलन स्थल पर पहुंचे।

10, 11 और 12 सितंबर तक तीन दिनों तक गांव में ही धरना प्रदर्शन चलने के बाद, 13 सितंबर को आंदोलन ने और तूल पकड़ा और यह वर्धा के जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने धरणे प्रदर्शन में बदल गया। महिलाओं के मजबूत साथ और ग्रामीणों की एकजुटता के आगे वन विभाग, राजस्व प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह लाचार हो गया था।

इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अतुल वांदिले की पहल पर विधायक रोहित पवार ने 15 सितंबर को आंदोलन स्थल का प्रत्यक्ष दौरा किया। उन्होंने सीधे वन मंत्री और जिला कलेक्टर से फोन पर सकारात्मक चर्चा करते हुए बातचीत को तेज किया और शासन की सुस्ती से अवगत कराया। इस आंदोलन में कांग्रेस के नेता एवं पूर्व मंत्री रणजीत कांबळे समेत कई सामाजिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया।

15 सितंबर की देर शाम तक चली सकारात्मक बैठक में प्रशासन ने नरमी बरतते हुए एक बड़ा समझौता किया। सहायता का विवरण इस प्रकार है: वन विभाग नियमानुसार सहायता 25 लाख रुपये, आदिवासी विकास विभाग विशेष निधि 10 लाख रुपये, वन विभाग अतिरिक्त विशेष निधि 10 लाख रुपये, निखिलस ब्याज मुक्त रोजगार योजना 7.5 लाख रुपये, और राजस्व विभाग तत्काल सहायता 50 हजार रुपये, इस प्रकार कुल सहायता ₹53 लाख रुपये तय हुई। इसके साथ ही मृतक धुर्वे के बेटे को वन विभाग में 'वन मजदूर' के रूप में नौकरी देने का भी फैसला हुआ।

हिंगणी रेंज के वन परिमंडल अधिकारी रुपेश खेडकर ने धुर्वे परिवार को तत्काल तीन चेक सौंपे। सांसद अमर काळे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि धुर्वे परिवार ने इस समझौते को स्वीकार कर लिया है।

ग्रामीणों की एकजुटता, महिलाओं के मजबूत समर्थन और नेताओं की मध्यस्थता के कारण 6 दिनों से लटका यह मामला आखिरकार सुलझ गया है। आज, 16 सितंबर को सुबह 11 बजे मृतक किसान भगवान धुर्वे का रायपुर जंगली गांव में सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया।