Amravati: चाइना-मेड वेंटिलेटर और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ीं 3 मासूम जिंदगियां? सुनील देशमुख का प्रशासन पर तीखा हमला
अमरावती: अमरावती के जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में हुए भीषण अग्निकांड में तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। इसी बीच, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. सुनील देशमुख ने प्रशासन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। अस्पताल के अग्निशमन सुरक्षा सिस्टम के वास्तव में चालू होने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डॉ. देशमुख ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लगे स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर के ऊपर लगा प्लास्टिक कवर तक नहीं हटाया गया था। इसी लापरवाही के कारण आग लगने पर न तो स्मोक डिटेक्टर का अलार्म बजा और न ही स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव शुरू हुआ। उन्होंने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि अगर तीन नवजात बच्चों की जान जाने जैसी गंभीर घटना के बाद भी प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होती, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
'चाइना-मेड' वेंटिलेटर और कमीशनखोरी का गंभीर आरोप
इससे भी बड़ा आरोप लगाते हुए डॉ. देशमुख ने अस्पताल में लगाए गए 'सिनलर' (Sinler) कंपनी के वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में लगाए गए वेंटिलेटर डुप्लिकेट और 'चाइना-मेड' हैं। इन मशीनों की खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और वित्तीय लेनदेन हुआ है।
उन्होंने मांग की कि इन वेंटिलेटरों की खरीद किसने की, तकनीकी जांच (Technical Inspection) किसने की, किस आधार पर फिटनेस प्रमाण पत्र दिए गए और इसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी किसकी थी। इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच होनी चाहिए।"मौजूदा प्रशासन पर किसी का कोई अंकुश नहीं रह गया है। ऐसे में आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाए?"
फिलहाल, इस दर्दनाक हादसे में तीन मासूमों की जान जाने के पीछे कौन सा सिस्टम, अधिकारी या तकनीकी खराबी जिम्मेदार थी, इसकी प्रशासनिक जांच चल रही है। वहीं, वेंटिलेटर के नकली होने और खरीद में कमीशनखोरी के आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब पूरे अमरावती की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निष्पक्ष जांच के जरिए इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।
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