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Nagpur: मेयो अस्पताल की कैंटीन पर FDA का छापा, बिना लाइसेंस और गंदगी मिलने पर लगाई सील


नागपुर: नागपुर के प्रसिद्ध इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो अस्पताल) परिसर में स्थित डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की कैंटीन पर अन्न व औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ताला लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। बिना वैध लाइसेंस व्यवसाय चलाने और स्वच्छता व खाद्य प्रबंधन में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद कैंटीन को बंद करने का आदेश जारी किया गया।

कार्रवाई कहां और कैसे हुई?
मध्य नागपुर स्थित मेयो अस्पताल परिसर में डॉक्टरों व मेडिकल विद्यार्थियों के लिए संचालित 'श्री बालाजी उपाहारगृह' (कैंटीन) का खाद्य सुरक्षा अधिकारी शीतल सुधाकर देशपांडे द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यहां स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए चाय, नाश्ता, भोजन और विभिन्न खाद्य सामग्री तैयार कर बेची जा रही थी, वह भी बिना किसी वैध लाइसेंस के।

कैंटीन पर सील क्यों लगाई गई?
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSAI Act, 2006) के तहत जरूरी वैध खाद्य लाइसेंस कैंटीन संचालक के पास मौजूद नहीं था। इसके चलते जब तक लाइसेंस, जरूरी दस्तावेज और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर सभी कमियों को दूर नहीं कर लिया जाता, तब तक के लिए कैंटीन को पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में सामने आईं ये गंभीर कमियां:

  • लाइसेंस का अभाव: बिना वैध खाद्य सुरक्षा लाइसेंस के खाद्य पदार्थों की बिक्री।
  • गंदगी व स्वच्छता की अनदेखी: भोजन तैयार करने और उसे परोसने में स्वच्छता के मानकों का घोर उल्लंघन।
  • कचरा प्रबंधन नहीं: कैंटीन परिसर में कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था का न होना।
  • जल परीक्षण रिपोर्ट गायब: उपयोग में लाए जा रहे पानी की गुणवत्ता और जांच रिपोर्ट उपलब्ध न होना।
  • कर्मचारियों की मेडिकल जांच नहीं: कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण (मेडिकल फिटनेस) रिकॉर्ड न होना।

कब से संचालित हो रही थी कैंटीन?
कैंटीन संचालक पीयूष रवींद्र लारोकर के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा यह जगह 10 अक्टूबर 2025 से किराए पर दी गई थी। इसके बाद से यहां विद्यार्थियों और डॉक्टरों के लिए खाद्य पदार्थों की बिक्री लगातार की जा रही थी।

कड़े सुधार के बाद ही खुलेगी कैंटीन
FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक संचालक जरूरी खाद्य लाइसेंस हासिल नहीं कर लेता, सभी संबंधित दस्तावेज और रिपोर्ट जमा नहीं करता तथा जांच में पाई गई तमाम कमियों को दुरुस्त नहीं कर लेता, तब तक कैंटीन दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सहायक आयुक्त शाह और खाद्य सुरक्षा अधिकारी शीतल देशपांडे की टीम द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई के बाद शहर के अन्य सरकारी व निजी अस्पताल परिसरों में चल रही कैंटीन संचालकों में भी हड़कंप मच गया है।