Amravati: ग्राम पंचायतों पर प्रशासक नियुक्ति का आदेश वापस; सरपंच, उपसरपंच और सदस्यों में नाराज़गी
अमरावती: मुंबई उच्च न्यायालय में दाखिल रिट याचिका के बाद राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों पर सरपंचों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का आदेश वापस ले लिया है। इसके बजाय सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सरपंच, उपसरपंच और सदस्यों में नाराज़गी और भ्रम का माहौल बन गया है।
ग्राम विकास विभाग के अपर सचिव बा. म. आसोले ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह आदेश जारी किया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 की निधि यदि 31 मार्च तक खर्च नहीं होती है, तो उसे समर्पित करना होगा।
संबंधित ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। 15 जनवरी 2021 को चुनाव संपन्न हुए थे और सदस्य 15 फरवरी 2021 को पदभार संभाल चुके थे। इसलिए 15 फरवरी 2026 से पहले नए चुनाव होना अपेक्षित था। लेकिन चुनाव कार्यक्रम घोषित न होने के कारण प्रशासक नियुक्त करने की संभावना बन गई थी।
इससे पहले 23 जनवरी 2026 को सरकार ने परिपत्र जारी कर, कार्यकाल समाप्त होने वाली ग्राम पंचायतों पर नए सदस्य पदभार स्वीकार करने तक प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के खिलाफ नागरिकों ने मुंबई उच्च न्यायालय, नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ग्राम पंचायतों का प्रशासन केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से ही होना चाहिए और समय पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है। ग्राम पंचायतें ग्रामीण स्तर की महत्वपूर्ण स्थानीय स्वराज्य संस्थाएं हैं, जिनकी प्रमुख जिम्मेदारियां हैं – स्वच्छता, स्वास्थ्य, पानी की आपूर्ति, सड़कें, बिजली, कर वसूली और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।
अल्प अवधि में दो अलग-अलग आदेशों के कारण सरपंच, उपसरपंच और सदस्यों में भ्रम का वातावरण उत्पन्न हुआ है। अब यह ग्राम पंचायतों पर किन अधिकारियों की नियुक्ति होगी, इस पर ग्रामीणों की निगाहें लगी हैं।
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