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Nagpur

'एक है तो सेफ हैं', भाषणों के साथ अब इश्तेहार में भी दिखाई देने लगा नारा


नागपुर: राज्य में विधानसभा चुनाव की लड़ाई अब पूरे शबाब पर है. अर्श से लेकर फर्श तक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं. विपक्ष जहां सत्ता पक्ष की विफलता बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष को प्रिय बहन योजना का दुश्मन बनाने की कोशिश कर रहा है. इस चुनाव में लड़की बहिन योजना सत्ताधारी दल का सबसे बड़ा हथियार है।

हालांकि, समय रहते यह हथियार फेल न हो जाए, इस डर से सत्ताधारी पार्टियों में से एक बीजेपी ने अपने 'प्लान बी' पर अमल करना शुरू कर दिया है. इसी के तहत प्रगतिशील महाराष्ट्र में भी 'कटेंगे तो बटेंगे' का नारा लगाया जाने लगा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले महाराष्ट्र में इसकी घोषणा की. अब राज्य के अन्य नेता भी अपना कोटा छोड़ रहे हैं.

लेकिन महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार करने पहुंचे प्रधानमंत्री को ये नारा बोलने में दिक्कत हो रही थी. क्योंकि प्रधानमंत्री एक संवैधानिक पद है. तो मोदी ने एक नया विकल्प ढूंढ लिया है. 'एक है, तो सेफ हैं' वह विकल्प है। सोमवार को सभी प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में छपे भाजपा के एक विज्ञापन में 'एक है, तो सैफ हैं' का नारा दिया गया और इसमें महाराष्ट्र के प्रभुत्वशाली समाज के प्रतीक टोपी की तस्वीर दिखाई गई। इसमें शीतकालीन टोपी है. मावला जैसी टोपी होती है. यह शाहू महाराज के समय की पगड़ी है। पुणेरी पगड़ी है।

आदिवासी संस्कृति का प्रतीक साफा कोली बंधुओं द्वारा पहनी जाने वाली लाल टोपी है। गांवों में आज भी गांधी टोपी पहनी जाती है। अम्बेडकर जयंती की रैलियों में नीली पगड़ी पहनी जाती है। इतना ही नहीं, पूरी दुनिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी काली टोपी पहनते हैं। केवल एक टोपी है, गोल टोपी जो मुस्लिम भाई पहनते हैं। अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि मुस्लिम भाइयों की गोल टोपी क्यों नहीं है।

ज्ञात हो कि, लोकसभा चुनाव में आरक्षण और जातियों का मुद्दा खूब चला था। जिसके कारण भाजपा को महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। जिसमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान मुख्या था। हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथ ने पहली बार यह नारा बोला था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ ने भी इसका समर्थन करते हुए हिन्दू समाज को एक रहने की बात कही।