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Buldhana: 'गाली' कांड पर झुके शिवसेना विधायक संजय गायकवाड, जताया खेद; पर शिवाजी महाराज के 'सम्मान' पर अब भी अडिग


बुलढाणा: अपने विवादित बयानों और आक्रामक शैली के लिए पहचाने जाने वाले शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड ने आखिरकार प्रकाशक प्रशांत आंबी को फोन पर दी गई गालियों के मामले में माफी मांग ली है। हालांकि, गायकवाड ने स्पष्ट किया है कि छत्रपती शिवाजी महाराज का नाम 'एकेरी' (बिना सम्मानसूचक शब्द के) लेने के विरोध में उनकी भूमिका अब भी पहले जैसी ही सख्त है।

क्या है पूरा मामला?
दिवंगत गोविंद पानसरे द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'शिवाजी कोण होता?' के प्रकाशक प्रशांत आंबी को विधायक गायकवाड ने फोन कर अभद्र भाषा में गाली-गलौज की थी। विधायक का आरोप था कि पुस्तक के कवर और सामग्री में शिवाजी महाराज का उल्लेख केवल 'शिवाजी' किया गया है, जो उनका अपमान है।

इस घटना का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विधायक गायकवाड की जमकर आलोचना हुई। लोगों का कहना था कि विधायक ने बिना पुस्तक पढ़े केवल कवर देखकर ही हंगामा खड़ा कर दिया।

'शब्दों के लिए माफी, पर रुख वही'
चौतरफा दबाव और महायुति के नेताओं द्वारा इस मामले से पल्ला झाड़ने के बाद संजय गायकवाड ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "विवाद के दौरान आवेश में आकर मेरे मुंह से कुछ गलत शब्द निकल गए, जिसके लिए मैं दिल से माफी मांगता हूं। यह विवाद का नहीं, बल्कि संस्कार और आदर का विषय है। मैं आज भी इस बात पर कायम हूं कि करोड़ों हिंदुओं के आराध्य का नाम हमेशा 'छत्रपति शिवाजी महाराज' ही लिया जाना चाहिए।" गायकवाड ने आगे कहा कि जिन्हें बुलढाणा में आकर यह किताब पढ़नी है वे शौक से पढ़ें, लेकिन महाराज का अपमान सहन नहीं किया जाएगा।