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Nagpur

मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कार्यकर्ताओं का सर नीचा हो, उपमुख्यमंत्री की भावनात्मक अपील, कहा- नागपुर मेरी कर्म भूमि


नागपुर: उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पूरी तरह से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियो में उतर आये है. सरकार चलाने के ही साथ फडणवीस इन दिनों कार्यकर्ताओ के साथ संवाद में व्यस्त है. इसी कड़ी में उन्होंने अपने खुद के विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्त्ताओ से संवाद किया. अपने भाषण में फडणवीस राजनीति के साथ भावनात्मक जुड़ाव की बांतें भी की.

यें साफ है की भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में ही लड़ने जा रही है. चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहें. इसे लेकर फडणवीस जी जान लगाते दिखाई दे रहें है. राज्य भर में कार्यकर्ताओ के साथ संवाद के क्रम में फडणवीस जिस नागपुर की दक्षिण- पश्चिम सीट से विधायक है वहाँ के कार्यकर्त्ताओ के बीच पहुंचे. जहाँ उन्होंने राजनीतिक नेता के तौर पर कम भावनात्मक जुड़ाव की बांतें ज्यादा की. सामान्य तौर से अपनी निजी बांतें कम ही करने वाले फडणवीस ने अपने क्षेत्र में मन से बात.

अपने खुद के राजनीतिक जीवन की आकस्मिक तौर पर शुरू हुई शुरुवात हो. या फिर नगरसेवक से लेकर महापौर, विधायक, मुख्यमंत्री और अब उपमुख्यमंत्री अपने सारे राजनीतिक जीवन में मिले मौक़े सबकुछ कार्यकर्ताओ और क्षेत्र की जनता को समर्पित कर दिया. फडणवीस ने कहां की 25 उन्हें विधायक बने हो गया लेकिन शुरुआती जीवन में उन्होंने कभी नहीं सोचा था की वो राजनीती में जायेंगे. मौजूदा समय में महारास्ट्र की राजनीती के मंझे खिलाडी फडणवीस ने कहां की वो तो वकील बनना चाहते थे. लेकिन संयोग ऐसे बने की उन्हें राजनीति में आना पड़ा. पर अब अंतिम सांस तक वो इसी भूमिका में रहेंगे.

  • इतने लंबे राजनीतिक करियर में मुझ पर एक दाग नहीं 
  • राज्य में 20 मुख्यमंत्री हुए मै पहला मुख्यमंत्री हूँ जिसके पास मुंबई में खुद का घर नहीं है 
  • मैंने कभी कोई ऐसा काम नहीं किया की कार्यकर्ताओ का सर झुके 
  • आगे भी इसी तरह से मेरा काम जारी रहेगा
  • पहली बार वार्ड अध्यक्ष बना तो वॉल पेंट करने का काम करता था 
  • कार्यकर्ताओ और जनता के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री भी बना 
  • अपने लिए कभी पद का फायदा नहीं उठाया, मुख्यमंत्री रहा लेकिन भ्रस्टाचार का दाग तक नहीं लगने दिया 
  • पार्टी मेरी संपत्ति है, मैंने ना कॉलेज बनवाये और ना ही कारखाने 
  • मै यें नहीं कहता की जनता की सारी अपेक्षाओं को पूरा किया लेकिन कुछ ऐसा भी नहीं किया की आपका सिर झुके 
  • नागपुर मेरी कर्मभूमि है 
  • पहले हमें नागपुर के लिए स्पेशल ग्रांट के लिए लड़ना पड़ता था, अब आयकोनिक प्रोजेक्ट मिल रहें है.
  • देवेंद्र फडणवीस समस्याओ लें लिए नहीं बल्कि समस्याओ के उत्तर के लिए है.

फडणवीस ने अपने भाषण में भावनात्मक रूप से जुड़ाव को स्पस्ट कर दिया की वो अगला चुनाव दक्षिण-पश्चिम सीट से ही लड़ने वाले है. ऐसे में उन्होंने कार्यकर्ताओ को काम में जुट जाने का भी संदेश दिया. लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहां की हमसे चूक हुई है. कांग्रेस के साथ विपक्ष के दलों ने हमारे विरोध में नेरेटिवह तैयार किया और हम 400 पार के नारे में इतने खो गए की जमीन पार काम करने में पीछे रह गए.

मगर जों कमी रह गयी है उसे विधानसभा चुनाव में दूर करना है. सिर्फ दो महीने कार्यकर्त्ता सब कुछ भूलकर मैदान में उतरे तो बड़ी जीत हासिल होंगी. फडणवीस ने मौजूदा दौर में खुद के ऊपर हो रहें हमलों का भी जिक्र किया और कहां.

  • राज्य में तीन पार्टी की सरकार है लेकिन हमले सिर्फ उन पार हो रहें है.
  • ऐसा इसलिए क्यूंकि विरोधियो को मालूम है की ताकत किसके पास है
  • मुझे अभिमन्यु जैसा फंसाने की कोशिश हो रही है 
  • लेकिन मुझे मालूम है चक्रयूह को कैसे भेदना है.
  • कार्यकर्त्ता अगर मजबूत होंगे तो मै मजबूत होऊंगा.

 जों नेतृव मेरे पास है वो किसी के पास नहीं अगर सब साथ मिलकर लड़े सामने कोई भी रहें हमारी जीत पक्की है.

फडणवीस इन दिनों कार्यकर्त्ता से संवाद में सिर्फ जीत का मंत्र नहीं दे रहें बल्कि कमियों पार भी खुलकर चर्चा कर रहें है. अपने क्षेत्र में भी उन्होंने नेताओं और कार्यकर्त्ताओ को संवाद का महत्व समझा और उस पर अमल करने की सलाह दी. पार्टी नेताओं के आपसी मनमुटाव, बात नहीं करने की आदर को बदल कर शक्ति का संचय करने की सलाह दी. वो बोले भाजपा प्राइवेट लिमिटेड पार्टी नहीं है. कार्यकर्ताओ की मलकियत की पार्टी है. हमारे नेता एक दूसरे से बात नहीं करते लेकिन नेताओं को मतभेद ख़त्म करने का भाव लाना पड़ेगा. आपस में संवाद करना पड़ेगा. परिवार में एक दूसरे को संभालना पड़ता है. सबकुछ भूलकर मैदान में उतरना पड़ेगा. यें लड़ाई आसान नहीं है.

क्षेत्र की जनता को यें लगता होगा की उन्होंने मुझे चुना लेकिन मै मिले पद को संभालाने में उनसे दूर हो गया लेकिन ऐसा नहीं है. नागपुर मेरी कर्म भूमि है. जब हम बड़े होतें है तो कई तरह की कीमत चुकानी पड़ती है. फडणवीस ने कहां की मै राजनीतिक जीवन में हूँ आज मेरी बेटी 20 साल की कब हो गयी. मुझे पता ही नहीं चला. कूल मिलाकर अपने विधानसभा क्षेत्र में फडणवीस ने मन के भावो से संवाद साधा और कार्यकर्ताओ को चुनाव में जुट जाने का निर्देश दिया.