जिन पुरुषों ने लाड़ली बहना का पैसा लिया, उससे होगी वसूली; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा ऐलान; किसान कर्ज माफ़ी का भी लिया निर्णय
मुंबई/नागपुर: महायुति सरकार (Mahayuti Government) की महत्वकांशी योजना लाड़ली बहना योजना (Laadli Bahna Yojana) को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, "लगातार नौ महीने की छटनी और प्रक्रिया के बाद 80 लाख महिलाएं इस योजना से अपात्र घोषित हो चुकी है। आने वाले दिनों में इन महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि, महिलाओं के नाम पर 14 हजार पुरुषों ने योजना का लाभ लिया ऐसे लोगों से सरकार पैसे वसूल करेगी। मंगलवार को कैबिनेट के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थी महिलाओं की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन्हें योजना का लाभ मिलता रहेगा। वहीं, जिन महिलाओं ने केवाईसी नहीं कराई या जो निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करतीं, उन्हें योजना से बाहर रखा गया है।
राज्य सरकार के अनुसार ई-केवाईसी पूरी न करने, आवश्यक पात्रता शर्तों को पूरा न करने और आवेदन में त्रुटियों के कारण राज्य की करीब 80 लाख महिलाएं योजना के लिए अपात्र घोषित हुई हैं। इसके चलते उन्हें मिलने वाली 1500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता बंद कर दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि योजना से बाहर हुई महिलाओं से अब तक दी गई राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
फिर खुलेगी KYC विंडो
फडणवीस ने कहा कि राज्य की किसी भी पात्र महिला को योजना से नहीं हटाया गया है। केवल वे लाभार्थी अपात्र घोषित हुई हैं जो योजना के निर्धारित मानदंडों में फिट नहीं बैठतीं या जिन्होंने केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी भी कुछ महिलाओं को लगता है कि वे पात्र हैं, लेकिन किसी कारणवश उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसी महिलाओं को मौका देने के लिए सरकार एक बार फिर केवाईसी विंडो खोलने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने बताया कि योजना के लिए आय, आयु, सरकारी नौकरी और चार पहिया वाहन जैसी पात्रता शर्तें निर्धारित थीं। हालिया जांच में 4 से 5 लाख ऐसे लाभार्थी भी सामने आए हैं जिनके पास चार पहिया वाहन हैं।
आठ महीने तक खुली रही थी KYC प्रक्रिया
फडणवीस ने कहा कि योजना की शुरुआत में सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर लाभ दिया गया था ताकि महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके। यदि शुरुआत में ही पूरी जांच की जाती तो प्रक्रिया में एक से डेढ़ साल का समय लग जाता। बाद में CAG ऑडिट और पात्रता सत्यापन के लिए केवाईसी प्रक्रिया शुरू की गई, जिसे करीब आठ महीने तक खुला रखा गया था।
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