परिवहन विभाग में तबादलों और वसूली का बड़ा रैकेट, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से वडेट्टीवार की जांच कर कार्रवाई की मांग
चंद्रपुर/नागपुर: कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने आज परिवहन विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के एक गंभीर मामले का खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीओ विभाग में तबादलों और अवैध वसूली के लिए एक बड़ा रैकेट सक्रिय है और ईमानदार अधिकारियों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।
वडेट्टीवार ने कहा कि परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी बजरंग खरमाटे इस पूरे रैकेट के कथित सरगना हैं। उन्होंने वसूली के लिए समानांतर व्यवस्था खड़ी की है और आरोप है कि 100 रुपये की वसूली में से 90 रुपये खुद रखे जाते हैं। उन्होंने चंद्रपुर जिले के मोटर वाहन निरीक्षक पवन पोटदुखे के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई को भी पूर्वनियोजित साजिश बताया।
वडेट्टीवार के अनुसार, शिकायतकर्ता की लंबी यात्रा और टोल रिकॉर्ड में विसंगतियां इस बात का संकेत देती हैं कि यह मामला केवल पोटदुखे को फंसाने के लिए रचा गया। वडेट्टीवार ने आगे कहा कि विदर्भ में 64 अधिकारियों की आरटीओ में नियुक्ति हुई, लेकिन ये नियुक्तियां कथित रूप से कुछ प्रभावशाली लोगों की मर्जी के अनुसार नहीं हुईं, जिसके चलते अब उनकी पदोन्नति में बाधाएं डाली जा रही हैं। जो अधिकारी वसूली से इनकार करते हैं, उन्हें एसीबी के जाल में फंसाने या तबादले की धमकी दी जाती है।
उन्होंने नागपुर में आयोजित पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच की मांग की।
अशोक खरात प्रकरण और मंत्रियों के सरकारी आवास के कथित दुरुपयोग का जिक्र करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि कुछ लोग सत्ता में बने रहने या दूसरों को हटाने के लिए तंत्र-मंत्र जैसे उपायों का सहारा ले रहे हैं, जो संविधान की शपथ लेने वालों को शोभा नहीं देता।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री झिरवाळ के कार्यालय में एसीबी ट्रैप के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और अब सरकारी आवास के दुरुपयोग के मामले में भी जांच होनी चाहिए।
वडेट्टीवार ने कहा कि पुणे जमीन घोटाले से लेकर आरटीओ वसूली तक, सरकार केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई कर बड़े लोगों को बचा रही है। वर्तमान सरकार में आंतरिक गुटबाजी और “गैंगवार” जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे महाराष्ट्र की छवि धूमिल हो रही है।
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