तुकाराम मुंढे को बड़ा झटका, गोरस भंडार पर की कार्रवाई को हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने बताया गैर-कानूनी
नागपुर: वर्धा का ऐतिहासिक गोरस भंडार, जिसकी शुरुआत वर्ष 1938 में महात्मा गांधी की सलाह पर हुई थी, एक बार फिर सुर्खियों में है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कार्रवाई को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने गैर-कानूनी करार दिया है। इस फैसले के बाद न सिर्फ FDA की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।
वर्धा स्थित प्रसिद्ध डेयरी संस्थान गोरस भंडार, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में महात्मा गांधी की सलाह पर हुई थी, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह संस्थान गाय के दूध, घी, खोवा, छाछ, पनीर समेत कई डेयरी उत्पादों के लिए जाना जाता है और इसके उत्पाद वर्धा सहित विदर्भ के कई जिलों में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
31 मई 2026 को FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में विभाग की टीम ने गोरस भंडार की उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों के पालन में कथित अनियमितताओं का दावा करते हुए टीम ने दूध, घी, छाछ, खोवा समेत विभिन्न उत्पादों के नमूने जांच के लिए लिए। साथ ही करीब 25.86 लाख रुपये का संदिग्ध स्टॉक जब्त कर उत्पादन इकाई को सील कर दिया गया और बाजार से उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश भी जारी किए गए।
FDA की इस कार्रवाई को गोरस भंडार प्रबंधन ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में चुनौती दी। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि कार्रवाई के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और FDA की सीलिंग कार्रवाई को गैर-कानूनी करार दिया।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इसने खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और नियामक एजेंसियों की शक्तियों की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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