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Reservation पर मराठा-कुनबी आमने सामने, OBC नेता Babanrao Taywade ने रिश्ते और लड़ाई की बतायी सच्चाई


नागपुर: मराठा आरक्षण के लिए शुरू आंदोलन के बीच देश के पहले कृषि मंत्री डॉ पंजाबराव देशमुख का नाम केंद्र में है. देशमुख को कुणबी समाज को आरक्षण का लाभ दिलाने वाला माना जाता है. कुणबी और मराठा के बीच एक सामाजिक अंतर हमेशा देखा जा सकता था जो इन दिनों कम होता दिखाई दे रहा है. इसकी वजह देशमुख ही है. 

मराठा आरक्षण के लिए फिर एक बार शुरू हुए आंदोलन में एक नाम का जिक्र बार बार हो रहा है. यहाँ तक की मराठा आरक्षण के लिए अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल डॉ पंजाबराव देशमुख का नाम ले रहे है. अपने दौर के वरिष्ठ नेता और देश के पहले कृषि मंत्री डॉ पंजाबराव देशमुख स्वतंत्रता पूर्व मध्य भारत के प्रमुख नेताओं में एक थे. वह संविधान सभा सदस्य भी थे उन्होंने विदर्भ में रहने वाले कुणबी समाज को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए न केवल काम किया बल्कि आरक्षण का लाभ किस तरह से मिल सकता है इसलिए जनजागृति भी फैलाई।

विदर्भ में रहने वाला कुणबी समाज देशमुख को आज भी मनाता है और यह भी मानता है की उन्हें आरक्षण का लाभ देशमुख की वजह से मिल रहा है. राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े के मुताबिक देशमुख ने उस समय मराठा समाज से कुणबी जाति को स्वीकारने की अपील की थी लेकिन उस समय मराठा समाज के लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

मराठा समाज को सीधे सीधे ओबीसी सर्टिफिकेट दिए जाने का विरोध हो रहा है. इस विरोध का विदर्भ में खासा असर है क्यूंकि यहाँ कुणबी समाज की संख्या अधिक है. तायवाड़े के मुताबिक मराठा समाज कुणबी सर्टिफिकेट मांग रहा है इसका सीधा मतलब है की यह माना जा रहा है की कुणबी और मराठा एक ही है. लेकिन कुनबी जाति है और मराठा समाज है आरक्षण जाति को मिलता है समाज को नहीं। नागपुर के राजा मुधोजी भोसले मराठा आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे है।

इस सवाल पर की क्या पूर्व में मराठा डॉ पंजाबराव देशमुख की अपनी को मान लेते तो वर्तमान में आंदोलन की नौबत ही नहीं आती. इसे समय की परिस्थितियों के अनुरूप आंकलन किये जाने की अपील कर रहे है. मुधोजी के मुताबिक उस समय के लोगों ने उस समय के हिसाब से निर्णय लिया अब मराठाओं की आर्थिक स्थिति के हिसाब से मांग उठ रही है जो जायज है.

नागपुर के राजा मुधोजी यह भी मान रहे है की जबसे यह आंदोलन शुरू हुआ है तब से मराठा और कुणबी समाज के बीच भेद खड़ा किये जाने का प्रयास हो रहा है जिसे सफल नहीं होने दिया जायेगा। परिस्थितिया अब बदल चुकी है कुणबी और मराठा के बीच रोटी-बेटी का संबंध स्थापित हो चुका है.

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