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Nagpur

मराठा आरक्षण पर सियासत तेज: विजय वडेट्टीवार का सरकार पर तीखा हमला, लक्ष्मण हाके ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी


नागपुर: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना के अंतरवाली सराटी में शनिवार सुबह से कड़ी धूप में बेमुदत अनशन पर बैठे आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील ने सरकार के आश्वासन के बाद आखिरकार 15 घंटे बाद अपना उपोषण वापस ले लिया है। शनिवार रात करीब 10:30 बजे मराठा आरक्षण उपसमिति के प्रमुख व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और विधायक प्रसाद लाड ने जरांगे पाटील से मुलाकात की, जिसके बाद करीब ढाई घंटे चली लंबी चर्चा में सरकार ने उनकी सभी मांगें मानने का भरोसा दिया और अगले 2-3 दिनों में शासनादेश (GR) जारी करने का लिखित आश्वासन दिया।  हालांकि, सरकार के इस कदम के बाद महाराष्ट्र की सियासत पूरी तरह गरमा गई है और विपक्ष सहित ओबीसी नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने शिंदे-फडणवीस-पवार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'डबल ढोलकी' और 'लबाड' (झूठी) सरकार करार दिया है। वडेट्टीवार ने कहा कि यह सरकार एक तरफ मुख्यमंत्री के जरिए ओबीसी आरक्षण को धक्का न लगने देने का दावा करती है और दूसरी तरफ अपने मंत्रियों को भेजकर जरांगे पाटील के साथ गुपचुप समझौता कर लेती है, जिसका सीधा मकसद दोनों समाजों को आपस में लड़ाकर अपनी सत्ता की कुर्सी सुरक्षित रखना है।

उन्होंने ओबीसी और बहुजन समाज को आगाह करते हुए कहा कि यह नया जीआर उनके अधिकारों के मुळावर उठने (नुकसान पहुंचाने) वाला है और यदि ओबीसी समाज के हितों को ठेस पहुंची, तो अब सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिसकी घोषणा कांग्रेस जल्द ही करेगी।

दूसरी ओर, ओबीसी आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता लक्ष्मण हाके ने इस पूरे घटनाक्रम को 'पॉलिटिकल प्री-प्लान्ड' (नियोजित) बताते हुए कहा कि यह सरकार की तत्परता नहीं बल्कि उसकी घोर लाचारी है, जो समय-समय पर मुख्यमंत्री और अपने नेताओं का अपमान करने वाले आंदोलनकारियों के आगे झुक गई। हाके ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार अगर किसी दबाव में आकर या केवल संख्या बल के आधार पर फर्जी कुणबी (जाति) सर्टिफिकेट बांटती है, तो ओबीसी समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ कहा कि बोगस सर्टिफिकेट जारी करने वाले तहसीलदार कार्यालयों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर उग्र हमले किए जाएंगे और समाज के हक की रक्षा के लिए वे कानून हाथ में लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।