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Nagpur

Solar Industries Blast: अभी तक नहीं निकले शव; घटना स्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री


नागपुर: बाजारगांव स्थित सोलर इंडस्ट्रीज में हुए ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हुई है, वहीं तीन गंभीर रूप से घायल हैं जिनका इलाज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं हादसे हुए 10 घंटे से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक शवों को बाहर नहीं निकाला गया है। वहीं कंपनी के गेट के बाहर परिजन बैठे हुए हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित दोनों उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार भी घटना स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। 

घटना के कारणों की होगी गहनता से जांच 

घटना स्थल का जायजा लेने के बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कारणों की जाँच करने की बात कही है। सोलर इंडस्ट्रीज में हुई विस्फोट की घटना का जायजा लिया। इस दौरान मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना भी दी। राज्य सरकार ने मृतकों के वारिसों को 5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है. उन्होंने कंपनी की ओर से 20 लाख रुपये की मदद का भी ऐलान किया है. इसी के साथ उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने का आश्वासन भी दिया। 

शवों को निकालने आ रही परेशानी 

हादसे हुए 10 घंटे का ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक शव बाहर नहीं निकाले जा सके हैं। जिस जगह पर यह ब्लास्ट हुआ है, वहां बड़ी मात्रा में टीएनटी मौजूद है। इस कारण शवों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। जब तक यह द्रव्य ठंडा नहीं हो जाता तब तक शवों को बाहर नहीं निकाला जा सकता है। 

परिजनों ने की सड़क जाम करने का प्रयास 

हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन कंपनी के मुख्या गेट के सामने जमा हो गए और सभी करखने के अंदर जाने की मांग करने लगे। पुलिस कर्मियों के समझाने के बावजूद परिजन नहीं माने और अंदर जाने की जिद करते रहे। इस दौरान परिजनों ने कंपनी प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। इस कारण परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। इस दौरान परिजनों ने अमरावती-नागपुर महामार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण वह कर नहीं सके। 

पुलिस ने किया लाठी चार्ज 

हादसे के बाद सैकड़ो की संख्या में लोग जमा हो गए और अंदर जाने की मांग करने लगे। स्थिति को संभालने का प्रयास लगातार किया जाता रहा, लेकिन वह मान नहीं रहे थे। इसी दौरान स्थिति को देखते हुए दंगा नियंत्रण पथक और एसआरपीएफ की अतिरिक्त कंपनी भी बुलाई गई। हालांकि, इसके बावजूद लोग आक्रामक होते रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। पुलिस के लाठीचार्ज करते ही लोग वहां से तीतर बितर हो गए। इसके बाद पुलिस ने कंपनी के गेट से 100 मीटर परिसर को सील कर दिया।