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Nagpur

दक्षिण-पश्चिम नागपुर विधानसभा सीट पर कैसा होगा चुनाव? कोई 2014 दोहराने, तो कोई टफ फाइट की कर रहा बात


नागपुर: राज्य में विधानसभा चुनाव का भले ही अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन उसके पहले ही राजनीति अपने उफान पर है। पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमला का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा रोचक चुनाव उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधानसभा क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम नागपुर विधानसभा में होने का दावा किया जा रहा है। कारण राज्य में महाविकास आघाड़ी के नेता सबसे ज्यादा फडणवीस पर हमलावर हैं। आगमी विधानसभा चुनाव में वह किसी भी कीमत पर उन्हें आसानी से नहीं जीतने देना चाहते हैं। वहीं भाजपा भी फडणवीस के लिए मैदान में उतर चुकी है। साथ ही जनता में भी इसको लेकर खूब चर्चा हो रही है। कोई 2014 की बात दोहराने की बात कर रहा तो कोई टफ फाइट होने का दावा कर रहा। 

दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट भाजपा या कहें देवेंद्र फडणवीस का गढ़ माना जाता है। जब से यह सीट बनी है। फडणवीस लागातार यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच रहे हैं। 2009, 2014 या 2019 फडणवीस के जीत का जो मार्जिन है वह लगातार बढ़ता ही गया है। 2014 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उतरे फडणवीस ने दक्षिण पश्चिम में 56 हज़ार से ज्यादा वोटों से जीता था। वहीं 2019 के चुनाव में मुख्यमंत्री रहते उन्हें 54 हज़ार से ज्यादा वोटों की मार्जिन से चुनाव में जीत मिली थी। 

हालांकि, वर्तमान में परिस्थिति थोड़ी बदली हुई है। नागपुर में आई बाढ़ सहीत राज्य सरकार को लेकर जनता में दिख रही नाराजगी ने उपमुख्यमंत्री के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है।  वहीं हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री गडकरी को 2019 के मुकाबले दक्षिण पश्चिम से कम वोट मिले। जिसके बाद विपक्षी उत्साहित हैं। कांग्रेस को लगता है इस बार वह दक्षिण पश्चिम में फडणवीस को मुश्किल में डाल सकते हैं। नागपुर शहर अध्यक्ष विकास ठाकरे ने तो आगमी विधानसभा चुनाव में देवेंद्र को हराने तक का दावा कर दिया है।

विधानसभा में बदली स्थिति को देखते हुए कांग्रेस सहित महाविकास आघाड़ी नेताओं ने अपनी तैयारी को धार देना शुरु कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल गुड़धे ने यहां से चुनाव लड़ने के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। गुडधे बीते एक साल से चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं। वह किसी न किसी मुद्दे पर फडणवीस पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं चुनाव नजदीक आते ही विधानसभा क्षेत्र में बैनर पोस्टर के जरिए फडणवीस पर हमला और तंज कस रहे हैं। यहीं नहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में विकास ठाकरे से अपनी दुश्मनी भुलाकर शहर भर में प्रचार किया। हालांकि, एनसीपी नेता अनिल देशमुख के नाम की भी चर्चा चल रही है लेकिन उनके नाम पर कांग्रेस नेताओं ने कुछ नहीं कहा है। 

विधानसभा में बदली हुई स्थिति को देखते हुए फडणवीस सहित भाजपा भी एक्टिव मोड़ पर है। फडणवीस लागातार पार्टी के कार्यकर्ताओं और लोगों से मिलकर बात कर रहे हैं। सभा ले रहे हैं। वहीं उनके साथ भाजपा भी जमीन पर उतर चुकी है। पार्टी खुद को बूथ स्तर पर मजबूत करने में लगी हुई है। शक्ति प्रमुख, बूथ प्रमुखों की लगातार बैठकें लेकर मतदाताओं से संवाद साधने का प्रयास किया जा रहा है। 

चुनाव को लेकर दोनों पार्टियों की तैयारी को लेकर आम जनता में भी चर्चा जोरों पर है। चाय, टपरी, गार्डन सहित अन्य जगहों में बैठने वाले लोगों के बीच यह हॉट टॉपिक बना हुआ है। दोनो दलों या नेताओं की तैयारियों को देखकर सभी अपना अपना आंकलन करने में लगे हुए हैं। लोगों में सबसे ज्यादा चर्चा फडणवीस वर्सेज गुडधे की हो रही है। अगर दोनों के बीच मुकाबला होता है तो परिणाम क्या निकलेगा इसको लेकर सभी अपनी अपनी बात रुख रहे हैं। कोई कहता है अगर दोनों के बीच लड़ाई हुई तो फिर एक बार 2014 वाला परिणाम दिखाई देगा। इसके पीछे तर्क देते हुए कहते हैं कि, फडणवीस बड़े नेता और मजबूत नेता हैं। वही प्रफुल्ल भले ही पांच बार नगरसेवक रहे हो लेकिन उन्हें उनके क्षेत्र जयतला के बाहर कोई नहीं जानता। कुछ तो यह भी दावा करते हुए सुनाई देते हैं कि, कांग्रेस के लोग खुद चाहते हैं गुड़धे चुनाव न जीते। 

हालांकि, कई चुनाव में टक्कर होने की बात भी कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में विधानसभा में आई समस्या, जनता से फडणवीस की दूरी सहीत अन्य कारणों का हवाला देते हुए चुनाव एक तरफा नहीं होने की बात कही। कुछ तो फडणवीस के हार तक का दावा कर रहे हैं।