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Maharashtra

विधानमंडल सत्र के दौरान विधायकों के समर्थकों को नहीं मिलेगा प्रवेश, पडलकर–आव्हाड समर्थकों के बीच झड़प के बाद विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का आदेश


मुंबई: मानसून सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में भारतीय जनता पार्टी विधायक गोपीचंद पडलकर और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सपा विधायक जीतेन्द्र आव्हाड के समर्थकों के बीच हुई झड़प पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कड़ा रुख अपनाया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने भविष्य में आयोजित होने वाले सभी सत्रों पर विधायकों के निजीअधिकारी और कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए नार्वेकर ने कहा कि, अब सत्र के दौरान केवल विधायकों, उनके निजी सहायकों और अधिकारियों को ही विधान भवन परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी।  

विधानसभा अध्यक्ष के आदेशानुसार, अब विधायकों के निजी कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं को सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इतना ही नहीं, अध्यक्ष ने मंत्रियों को सत्र के दौरान विधानसभा हॉल में बैठकें न करने का भी निर्देश दिया है। अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि मंत्री ये बैठकें अपने मंत्रालयों के हॉल में ही करें।

लोकसभा की तर्ज पर बनेगी आचार एवं मूल्य समिति

राहुल नार्वेकर ने कहा है कि विधायकों के नैतिक आचरण के उच्च मानदंडों को बनाए रखने के लिए लोकसभा की तर्ज पर एक आचार एवं मूल्य समिति बनाने की योजना है। इसके लिए, राहुल नार्वेकर ने कहा है कि विधान परिषद अध्यक्ष के साथ विचारों का आदान-प्रदान और समूह के नेताओं से चर्चा के बाद अगले सप्ताह इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।

मंत्रियों पर भी बैठकें करने पर रोक


राहुल नार्वेकर ने कहा कि कई बार मंत्रियों से भी अनुरोध किया जाता है कि वे अपने निजी सहायकों को विधानमंडल के हॉल में बैठकें करने की अनुमति दें। हालाँकि, अब उन्हें मंत्रालय में अपने कक्षों में ही बैठकें करनी होंगी। नार्वेकर ने यह भी स्पष्ट किया कि अत्यंत महत्वपूर्ण परिस्थितियों में, माननीय अध्यक्ष और अध्यक्ष की अध्यक्षता वाले बोर्ड की स्वीकृति के बिना, मंत्रियों को विधानमंडल में बैठकें करने और आगंतुकों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

समर्थकों के व्यवहार की ज़िम्मेदारी भी विधायकों की होगी

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि, "संविधान के प्रति सभी उत्तरदायी हैं। संविधान के अनुसार, हमारे पास विधानमंडल और अन्य सभी संस्थाएँ हैं। विधानमंडल के सदस्य के रूप में शपथ लेते हुए, हमने सच्ची श्रद्धा, निष्ठा और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की शपथ ली है। इसका कड़ाई से पालन अपेक्षित है। इस दृष्टि से, सत्र के दौरान केवल माननीय सदस्यों, उनके अधिकृत निजी सहायकों और सरकारी अधिकारियों को ही विधानमंडल परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी। अन्य आगंतुकों को अनुमति नहीं होगी। अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि विधायकों के साथ आने वाले समर्थकों के आचरण के लिए उन्हें जवाबदेह बनाना आवश्यक है।"