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Chandrapur

आचार संहिता पर भड़के सुधीर मुनगंटीवार, बोले- "साल भर चुनाव होंगे तो विकास कार्य कैसे होंगे?"


- पवन झबाडे

चंद्रपुर: बार-बार होने वाले चुनाव और उनके चलते लगातार लागू होने वाली आचार संहिता को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने चुनावी व्यवस्था पर तीखी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूरे साल किसी न किसी चुनाव के कारण आचार संहिता लागू रहेगी, तो विकास कार्य आखिर कैसे पूरे होंगे?

मुनगंटीवार ने कहा कि लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय स्वराज संस्थाओं और विधान परिषद जैसी विभिन्न चुनाव प्रक्रियाओं के कारण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान विकास कार्यों से हटकर चुनावी गतिविधियों पर केंद्रित हो जाता है। इसका सीधा असर जनता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकल्पों और योजनाओं पर पड़ता है। उन्होंने आचार संहिता पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार लागू होने वाली यह व्यवस्था विकास की गति को बाधित करती है। लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं, लेकिन विकास कार्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

स्थानीय स्वराज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि जब तक जिला परिषदों के चुनाव नहीं हुए हैं, तब तक अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव कराना ग्रामीण जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के मूलभूत मुद्दे लंबित पड़े हैं, ऐसे में चुनावों को प्राथमिकता देना कितना उचित है?

विधान परिषद चुनावों की वर्तमान प्रणाली पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। मुनगंटीवार ने कहा कि यदि किसी को विधायक बनना है, तो उसे सीधे जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए। अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की बजाय प्रत्यक्ष जनमत के आधार पर प्रतिनिधियों का चयन लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाएगा।

उन्होंने बताया कि चुनाव व्यवस्था और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता के मुद्दे पर वह केंद्र सरकार को पत्र लिखने वाले हैं। चुनावों पर होने वाला खर्च, प्रशासनिक बोझ और विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।मुनगंटीवार के इस बयान के बाद राज्य की चुनावी व्यवस्था, आचार संहिता और स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही उनके बयान पर आने वाले दिनों में गंभीर चर्चा होने की उम्मीद भी व्यक्त की जा रही है।