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Nagpur

क्या अनिल सोले की बगावत भाजपा को पड़ेगी महंगी? नामांकन वापस लेने के लिए आखिरी समय सबने किया इंतजार


नागपुर: चुनाव के दौरान किसी का हाथ छोड़कर दूसरे का हाथ थाम लेना या अपना अलग रुख पेश करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन, इस बगावत की वजह से बड़ी पार्टियों के समीकरण पूरी तरह से बिखर गए हैं। नागपुर स्नातक चुनाव में अनिल सोले की बगावत की वजह से भाजपा भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रही है।

अनिल सोले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, नागपुर के पूर्व महापौर और महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व विधायक हैं। उन्होंने 2014 से 2020 तक नागपुर विभाग स्नातक चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। कुल मिलाकर, उन्हें नागपुर में भाजपा  संगठन, महानगर पालिका और स्नातक चुनाव क्षेत्र की राजनीति का लंबा अनुभव है। हालांकि, BJP ने 2026 के नागपुर स्नातक चुनाव के लिए पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को आधिकारिक उम्मीदवारी दी। इस तरह, इस चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रो. अनिल सोले ने बाद में निर्दलीय के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करने का फैसला किया। उनके मुताबिक, उन्होंने यह फैसला अपने समर्थकों के कहने पर लिया जो कई महीनों से काम कर रहे थे।

निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन करने के फैसले की घोषणा होते ही भाजपा के सोले खेमे में हलचल मच गई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाना शुरू कर दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण तुरंत नागपुर पहुंचे और अनिल सोले के घर पहुंचे, लेकिन अनिल सोले चव्हाण से नहीं मिले। इसके बाद भी सोले को मनाने की कोशिशें जारी रहीं। सोले गडकरी के खास आदमी थे, इसलिए नितिन गडकरी ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और उन्हें अपने मनाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें नाकाम रहे। तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद आगे आए। उन्होंने भी सोले को उम्मीदवारी वापस लेने के लिए तैयार करने की पूरी कोशिश की। हालांकि, मुख्यमंत्री को भी निराशा हाथ लगी।

वहीं अनिल सोले पिछले 24 घंटे से संपर्क में नहीं थे। ऐसे में भाजपा खेमे में सस्पेंस और बढ़ गया। जबकि शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकती थी। पार्टी आखिरी वक्त तक उनके फैसले का इंतजार करती रही, लेकिन सोले अपनी बात पर अड़े रहे। इस बीच, इन सब घटनाक्रमों के बाद अनिल सोले संपर्क में आए और सीधे बड़कस चौक पहुंचे, जहां उनके समर्थकों ने पटाखों के साथ सोले का स्वागत किया। फिर अनिल सोले ने पंडित बच्छराज व्यास की मूर्ति पर माल्यार्पण कर चुनाव कार्य का बिगुल फूंका।