Winter 2026-27 Forecast: इस बार पड़ेगी कम ठंड या कंपकंपाएगी शीतलहर? नागपुर, विदर्भ और देश के अन्य हिस्सों में ठंड को लेकर क्या हैं शुरुआती संकेत
नागपुर/नई दिल्ली: मानसून के बाद अब देशभर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच सर्दियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अक्टूबर में दिन के समय धूप और गर्मी का असर बना हुआ है, जबकि सुबह और रात के तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस बार दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ेगी या तापमान सामान्य से ऊपर रहने के कारण सर्दियों का असर कम महसूस होगा?
इस बीच प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो (El Niño) की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों की नजर बनी हुई है। इसका प्रभाव वैश्विक तापमान और विभिन्न क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है। हालांकि, अल नीनो के आधार पर भारत में सर्दी कम पड़ने या शीतलहर के दिनों में निश्चित कमी होने का दावा करना फिलहाल जल्दबाजी होगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में सर्दियों का वास्तविक मिजाज स्थानीय मौसमी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
अल नीनो क्यों बना हुआ है चर्चा का विषय?
अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसके कारण वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव होता है, जिसका असर दुनिया के कई क्षेत्रों में तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है। अल नीनो का संबंध भारत के मानसून और वैश्विक तापमान से भी रहा है। हालांकि, इसका प्रभाव हर मौसम और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। भारत में सर्दियों के दौरान तापमान कैसा रहेगा, यह पश्चिमी विक्षोभ, ठंडी हवाओं, बादलों की स्थिति और अन्य क्षेत्रीय कारकों पर भी निर्भर करता है।
Winter 2026-27: सर्दियों को लेकर क्या हैं शुरुआती संकेत?
सर्दियों के आगामी सीजन को लेकर तीन प्रमुख पहलुओं पर नजर रहेगी।
1. तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना
वैश्विक तापमान के रुझानों और अल नीनो की स्थिति के कारण सर्दियों के दौरान तापमान पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, दिसंबर और जनवरी में भारत के सभी क्षेत्रों का न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का दावा करने वाला आधिकारिक राष्ट्रीय पूर्वानुमान फिलहाल इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
2. शीतलहर कितनी पड़ेगी, इस पर रहेगी नजर
उत्तर और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड के लिए उत्तर-पश्चिमी हवाएं, साफ आसमान और पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। इन परिस्थितियों के आधार पर ही शीतलहर की तीव्रता और अवधि तय होती है। इसलिए इस बार शीतलहर के दिन कम होंगे या नहीं, इसका स्पष्ट आकलन स्थानीय पूर्वानुमान आने के बाद ही किया जा सकेगा।
3. पहाड़ों में बर्फबारी पर निर्भर करेगा मैदानी इलाकों का मौसम
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश और बर्फबारी होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं की स्थिति का असर मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ सकता है। हालांकि, आगामी सर्दियों में बर्फबारी कम होगी या ज्यादा, इसे लेकर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नागपुर और विदर्भ में कैसी रहेगी सर्दी?
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में नागपुर, अमरावती, अकोला, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया और भंडारा जैसे जिलों में दिसंबर और जनवरी के दौरान रात का तापमान गिरने से ठंड बढ़ जाती है। कुछ परिस्थितियों में शीतलहर का असर भी देखने को मिलता है।
इस बार विदर्भ में भी अल नीनो की स्थिति के साथ न्यूनतम तापमान के रुझानों पर नजर रहेगी। यदि क्षेत्रीय परिस्थितियां तापमान बढ़ाने के अनुकूल रहती हैं, तो कुछ दिनों में रातें अपेक्षाकृत गर्म रह सकती हैं। वहीं, ठंडी हवाओं और अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण कड़ाके की ठंड भी पड़ सकती है। फिलहाल नागपुर और विदर्भ में सामान्य से 1 से 3 डिग्री अधिक तापमान रह सकता है।
IMD और ग्लोबल वेदर रिपोर्ट्स क्या बताएंगी?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु अनुसंधान संस्थानों के पूर्वानुमान सर्दियों के संभावित रुझानों को समझने में मदद करते हैं। हालांकि, वैश्विक जलवायु मॉडल और किसी शहर के लिए जारी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान अलग-अलग होते हैं।
सर्दियों के दौरान नागपुर, विदर्भ और देश के अन्य क्षेत्रों में तापमान तथा शीतलहर की स्थिति जानने के लिए IMD के क्षेत्रवार पूर्वानुमान और नियमित मौसम बुलेटिन महत्वपूर्ण होंगे। किसी विशेषज्ञ के नाम और संस्था की पुष्टि के बिना उनके नाम से अनुमानित बयान प्रकाशित करना भी उचित नहीं है।
दक्षिण भारत में बारिश, उत्तर भारत में ठंड का इंतजार
अक्टूबर के दौरान दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में बारिश को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, उत्तर भारत में तापमान में गिरावट और ठंड की शुरुआत स्थानीय मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। आने वाले हफ्तों में मौसम का रुख, रात के तापमान में बदलाव और पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता सर्दियों की तस्वीर स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस बार ठंड कम पड़ेगी या बढ़ेगी कंपकंपी?
अल नीनो की स्थिति के कारण Winter 2026-27 को लेकर दिलचस्पी जरूर बढ़ी है, लेकिन अभी से यह कहना सही नहीं होगा कि इस बार देशभर में कड़ाके की ठंड कम पड़ेगी। नागपुर और विदर्भ में भी सर्दियों की तीव्रता का आकलन आने वाले तापमान के आंकड़ों और मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमानों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिसंबर और जनवरी में मौसम किस करवट बैठेगा। क्या इस बार सर्दियां नरम रहेंगी या ठंडी हवाएं फिर से विदर्भ में कंपकंपी बढ़ाएंगी? इसका जवाब आने वाले महीनों में सामने आने वाले मौसम संबंधी आंकड़ों से मिलेगा।
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