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Nagpur

Winter Session 2025: शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन भी 7 मोर्चों का हल्लाबोल, विभिन्न मांगों को लेकर सरकार को घेरा


नागपुर: शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन भी जनआक्रोश थमता नजर नहीं आया। अलग–अलग सामाजिक संगठनों, समाजों और पीड़ित समूहों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर नागपुर की सड़कों से लेकर विधानभवन तक सरकार के खिलाफ जोरदार हल्लाबोल किया। कुल सात अलग–अलग मोर्चों ने आज सरकार के दरबार में दस्तक दी। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि अब भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।


नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन भी विरोध का सिलसिला जारी रहा। अलग–अलग मुद्दों को लेकर सात संगठनों ने मोर्चा निकालकर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा। भोई, ढिवर, कहार, केवट, निषाद एवं तत्सम समाजों ने नागपुर में भव्य मोर्चा निकाला। यह मोर्चा भोई समाज पंच कमेटी, नागपुर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मत्स्य मंत्री नितेश राणे को ज्ञापन सौंपा। इसमें आरक्षण में वृद्धि, जाति वैधता प्रमाणपत्र के नियमों में शिथिलता, विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, आर्थिक विकास महामंडल की स्थापना, मछली विक्रेताओं के लिए बाजार सुविधा और शिक्षा व रोजगार में विशेष योजनाओं की मांग की गई।

वहीं, जनकल्याण समाजोन्नती अन्याय भ्रष्टाचार निवारण समिति महाराष्ट्र ने भी विधानभवन को घेरा। समिति ने मुख्यमंत्री को 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, स्मार्ट मीटर हटाने, जनसुरक्षा विधेयक 2025 रद्द करने, कपास और सोयाबीन को उचित समर्थन मूल्य देने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता, टोल मुक्त महाराष्ट्र, विदर्भ राज्य निर्माण, पर्यावरण प्रदूषण पर रोक और शिक्षा–स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। 

निवेशकों के दर्द की आवाज भी आज नागपुर में गूंजी। राष्ट्रीय जनाधार सामाजिक संगठन के नेतृत्व में समृद्ध जीवन ग्रुप ऑफ कंपनी और मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी के पीड़ित निवेशकों ने विधानभवन पर लक्षवेधी धड़क मोर्चा निकाला। यशवंत स्टेडियम, धंतोली से विधानभवन तक निकाले गए इस मोर्चे में  पीड़ित लोग शामिल हुए। संगठन का आरोप है कि पिछले दस वर्षों से 44 लाख से अधिक निवेशकों के करीब 3,750 करोड़ रुपये अटके हुए हैं।

निवेशकों ने सरकार से जब्त संपत्तियों को बेचकर पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसी कड़ी में ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार यानी TPJP ने भी सरकार को अल्टीमेटम दिया। संगठन ने BUDS Act 2019 को सख्ती से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि देशभर में करोड़ों जमाकर्ता वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हैं, लेकिन सात साल बाद भी न्याय नहीं मिला। TPJP ने गैरकानूनी रिफंड पोर्टल और समितियों को रद्द कर 180 कार्यदिवस में 2 से 3 गुना राशि लौटाने की मांग की। 

यवतमाल जिले से आए गुरुदेव युवा संघ का मोर्चा भी चर्चा का विषय रहा। संगठन ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलनकारियों को “चॉकलेट नहीं, न्याय चाहिए।” दिव्यांग, गरीब किसान, आदिवासी, पारधी समाज और वंचित घटकों की समस्याओं को लेकर संगठन ने आरोप लगाया कि 20 दिसंबर 2024 को दिए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं हुए।

किसानों को पट्टे, फसल को हमीभाव, सातबारा साफ करने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण की मांग करते हुए संगठन ने कहा कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो इच्छामरण की अनुमति दी जाए। कुल मिलाकर, शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन नागपुर में जनता का गुस्सा सड़कों पर साफ नजर आया। सवाल यही है कि क्या सरकार इन मोर्चों की आवाज सुनेगी या फिर आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होंगे।