कमजोर मानसून से रबी पर भी जलसंकट के बादल; जिले में अब तक औसत बारिश की सिर्फ 56 फीसदी बारिश, सिंचाई बांधों में 58 प्रतिशत पानी
अमरावती: कमजोर मानसून का असर अब खेती के अगले मौसम पर भी दिखाई देने लगा है। खरीफ के बाद अब रबी मौसम में भी पानी की कमी का संकट गहराने के संकेत हैं। जिले में 1 जून से 10 सितंबर तक केवल 428 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो औसत बारिश का करीब 56 प्रतिशत है। जलग्रहण क्षेत्रों में भी कम बारिश होने के कारण सिंचाई बांधों में अपेक्षित जलस्तर नहीं बढ़ पाया है।
फिलहाल जिले के सिंचाई बांधों में कुल क्षमता का 58 प्रतिशत यानी 611 अरब लीटर पानी उपलब्ध है। सितंबर और अक्टूबर में होने वाली वापसी की बारिश से जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन सितंबर के शुरुआती दस दिन लगभग सूखे रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों के साथ बड़े क्षेत्र की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण अपर वर्धा बांध में फिलहाल 57 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। बारिश शुरू होने से पहले बांध में करीब 40 प्रतिशत पानी था। पिछले तीन महीनों में इसके जलस्तर में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, रबी मौसम की जरूरतों को देखते हुए यह पानी पर्याप्त होगा या नहीं, इस पर सवाल बना हुआ है।
जिले के सात बड़े और मध्यम तथा 48 छोटे सिंचाई बांधों की कुल 1047 अरब लीटर क्षमता की तुलना में वर्तमान में 611 अरब लीटर पानी उपलब्ध है। छोटे बांधों में पानी के स्तर में अपेक्षाकृत अच्छी वृद्धि हुई है, लेकिन बड़े और मध्यम बांधों की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
रबी की फसलों के लिए पानी की बड़ी जरूरत
अमरावती जिले में करीब 88 हजार 511 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के दायरे में है। रबी मौसम में लगभग 1 लाख 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की जाती है। इनमें करीब 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसान कुएं और नलकूप जैसी निजी सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर हैं, जबकि करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर है।
रबी में गेहूं और चना प्रमुख फसलें हैं और दोनों फसलों को पर्याप्त सिंचाई की आवश्यकता होती है। गेहूं के लिए करीब पांच बार पानी, जबकि चने के लिए कम से कम तीन बार पानी देना आवश्यक होता है। जल संसाधन विभाग की ओर से सामान्य परिस्थितियों में हर वर्ष नहरों के माध्यम से पांच बार पानी छोड़ा जाता है।
लेकिन इस वर्ष बांधों में उपलब्ध पानी को देखते हुए पांच बार पानी देना मुश्किल हो सकता है, ऐसी स्थिति जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने जताई है। अब सितंबर और अक्टूबर में अच्छी बारिश होकर बांधों का जलस्तर बढ़ता है, तभी रबी फसलों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना संभव होगा।
ऐसे में इस वर्ष अमरावती जिले के किसानों के लिए रबी मौसम भी बारिश और बांधों में उपलब्ध पानी पर निर्भर नजर आ रहा है। यदि वापसी की बारिश ने साथ नहीं दिया तो रबी फसलों के सिंचाई संकट में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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