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Buldhana: जिले में सूखे जैसे हालात: 92 मंडलों में फसलें तबाह, 30 दिनों से बारिश न होने से 74% घाटा


बुलढाणा: बुलढाणा जिले में सावन के महीने में सूखे जैसे संकट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जुलाई के अंत में हुई झमाझम बारिश ने खरीफ की फसलों को नई जिंदगी दी थी, लेकिन अगस्त का पूरा महीना लगभग सूखा बीत गया। पिछले एक महीने से बारिश की एक बूंद न गिरने के कारण खेतों में खड़ी सोयाबीन और अन्य नकदी फसलें पूरी तरह सूखकर करप गई हैं। जिले के 92 राजस्व मंडलों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

आंकड़ों में समझिए बारिश की बेरुखी
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के महीने में बुलढाणा में सामान्य बारिश का सिर्फ 25.9 प्रतिशत पानी ही बरसा। इसका मतलब यह है कि जिले में बारिश का घाटा (Rain Deficit) 74.1 फीसदी तक पहुंच चुका है। 92 राजस्व मंडलों में से कई मंडलों में पूरे महीने में केवल 1 से 3 दिन ही हल्की फुहारें दर्ज की गईं।

सोयाबीन पर सबसे बुरा असर, फूल झड़े और फलियां खाली
एक महीने से जारी लंबे सूखे ने फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है:

  • फसलें करपीं: तेज धूप और पानी के अभाव में सोयाबीन के पौधे पीले पड़कर सूखने लगे हैं।
  • उत्पादन पर मार: पौधों से फूल समय से पहले ही झड़ गए हैं और फलियों में दाने नहीं भर पा रहे हैं।
  • दोहरा संकट: बारिश की भारी कमी, बेहद कम बरसाती दिन और असमान वितरण के कारण खरीफ सीजन का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है।

अब केवल 'सितंबर' से उम्मीद
फसलों की बर्बादी देख किसानों की आंखों के सामने अंधेरा छा गया है। उत्पादन में भारी गिरावट तय मानी जा रही है, जिससे किसानों पर कर्ज और आर्थिक संकट का खतरा गहरा गया है। अब खरीफ की बची-खुची उम्मीदें सिर्फ सितंबर की बारिश पर टिकी हैं। किसान बेबसी से आसमान की ओर देखकर झमाझम बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय किसान सिद्धार्थ सालवे ने कहा, "महीने भर से बारिश नहीं हुई है। सोयाबीन के फूल झड़ गए हैं और फलियों में दाना नहीं बन रहा। अगर अगले कुछ दिनों में तेज बारिश नहीं हुई, तो पूरी लागत डूब जाएगी और हाथ में कुछ नहीं बचेगा।"