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अमरावती अस्पताल में आग मामला- एक नवज़ात बच्ची की मौत परिजनों पर आरोप लापरवाही ने ली जान


अमरावती -अमरावती के जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू विभाग के वेंटिलेटर में शार्ट सर्किट से लगी आग के बाद नवजात शिशुओं को आनन फानन में दूसरे जगह शिफ्ट किया गया। इस दौरान ही एक नवजात की मौत हो गई। इस मामले में आरोप है बच्चे को  ऑक्सीजन और वेंटिलेटर ठीक से उपलब्ध नहीं कराया गया था, हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इस बात से इंकार किया है.इस 11 दिवसीय शिशु की मौत के मामले में जिला शल्य चिकित्सक डॉ दिलीप सौंदले ने बताया की जिस बच्ची की मृत्यु हुई है उसकी हालत पहले से ही कमजोर थी.उसका वजन कम था और वो वेंटिलेटर पर थी.

 
अमरावती जिला महिला अस्पताल (डफरिन) के एसएनसीयू विभाग में  रविवार को  शॉर्ट सर्किट के कारण वेंटिलेटर में आग लगी थी।  जिससे  एसएनसीयू विभाग में भर्ती नवजात शिशुओं को तुरंत दूसरी जगह स्थानांतरित  किया। जब ये हादसा हुआ तब एसएनसीयू  में 12  नवजात शिशुओ  का इलाज चल रहा था जिनमें से दो पहले से ही वेंटिलेटर पर थे और उनकी हालत गंभीर थी, जबकि आग की वजह से धुंआ होने पर बच्चों की हालत और भी नाजुक हो गई थी। इस दौरान आनन फानन में बच्चों को वहां से बाहर निकालकर दूसरे जगह शिफ्ट किया गया। जो दो बच्चे पहले से ही वेंटिलेटर पर थे उन्हें अमरावती के सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल में एसएनसीयू में ले जाया गया।  लेकिन इस दौरान एक नवजात शिशु की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस नवजात शिशु की मौत हुई उसका जन्म समय से पहले हुआ था और उसका वजन भी कम था. लेकिन परिजनों का आरोप है कि आग लगने की घटना के बाद बच्ची को दूसरी जगह शिफ्ट करने के दौरान ऑक्सीजन और वेंटिलेटर ठीक से उपलब्ध नहीं कराया गया था.लेकिन इस मामले में जिला सर्जन डॉ दिलीप सौंदले ने कहा कि आग का बच्ची की मौत से कोई लेना-देना नहीं है। फ़िलहाल इस मामले में जांच चल रही है। वही राज्य की पूर्व महिला एवं बाल कल्याण मंत्री यशोमति ठाकुर ने भी इस मामले की जाँच की मांग की है.