‘गाड़ी में डीजल नहीं’, युवती की तलाश नहीं कर सकता" पांचपावली थाना पीआई का वीडियो वायरल; वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा
नागपुर: महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां के पांचपावली पुलिस स्टेशन क्षेत्र से एक लड़की लापता हो गई, जिसके बाद परेशान परिजन तुरंत शिकायत लेकर थाने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाने के बजाय यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "थाने की गाड़ी में डीजल नहीं है, इसलिए हम ढूंढने नहीं जा सकते।" इस दौरान किसी ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहाहै।
वायरल वीडियो के अनुसार, पिछले दिनों एक युवती अपने घर से गायब हो गई, युवती के गायब होने के बाद परिजन पांचपावली थाना पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराइ। इस दौरान परिजनों से पुलिसकर्मियों से युवती को जल्द से जल्द ढूढ़ने की मांग की। हालांकि, इस दौरान थाने के इंचार्ज ने यह कहते हुए ढूढ़ने से इनकार कर दिया कि, युद्ध चल रहा है। वाहन में डीजल नहीं है।"
इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि, "पुलिस ने यह दलील भी दी कि लड़की 21 साल की है, वह बालिग है और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकती है। इस संवेदनहीन रवैए के बाद पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हो गया, जिससे स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया है।
इवेंट्स के लिए पैसा, सुरक्षा के लिए डीजल नहीं: विजय वडेट्टीवार
इस मामले के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने शिंदे-फडणवीस सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। वडेट्टीवार ने कहा कि गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह जिले में अगर पुलिस के पास लापता बेटियों को ढूंढने के लिए डीजल तक के पैसे नहीं हैं, तो यह पूरी व्यवस्था के दिवालियापन की निशानी है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ताधारियों के पास करोड़ों रुपये के इवेंट, सेल्फी और पीआर (PR) विज्ञापनों के लिए तो बजट है, लेकिन जनता की सुरक्षा के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
'यह अमृतकाल नहीं, व्यवस्था की नाकामी का काल है'
बीजेपी के 'सुरक्षित महाराष्ट्र' के दावों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि एक तरफ देश को 'अमृतकाल' के सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं, और दूसरी तरफ पुलिस स्टेशन की गाड़ियां ईंधन के अभाव में खड़ी हैं। यह अमृतकाल नहीं, बल्कि सिस्टम के पूरी तरह फेल होने का काल है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नागपुर जैसे बड़े शहर में पुलिस की यह हालत है, तो ग्रामीण इलाकों में एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इस घटना के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग महाराष्ट्र पुलिस के इस रवैए और सरकार के वीआईपी कल्चर पर जमकर गुस्सा निकाल रहे हैं।
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