नाशिक से फूटा नीट का 'पाप': यहीं बनी थी लीक पेपर की पहली कॉपी; केंद्र ने परीक्षा की रद्द, 22 लाख छात्र बेहाल!
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा को पूरे देश में रद्द (Cancel) कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि परीक्षा का पेपर लीक हो चुका था, जिसके बाद 22 लाख छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यह कदम उठाया है।
नाशिक बना इस महा-घोटाले का 'एपिसेंटर'
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ने पूरे देश को चौंका दिया है। पता चला है कि नीट पेपर लीक की पहली कॉपी महाराष्ट्र के नाशिक में तैयार की गई थी। परीक्षा शुरू होने से करीब 42 घंटे पहले ही प्रश्नपत्र माफियाओं के हाथ लग चुका था। नाशिक से यह 'पाप की कॉपी' हरियाणा भेजी गई, जहाँ इसके 10 अलग-अलग सेट बनाए गए। वहां से यह जहर बिहार, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में फैलाया गया।
CBI की एंट्री, नाशिक और राजस्थान से गिरफ्तारियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है।
- नाशिक कनेक्शन: नाशिक के इंदिरानगर इलाके से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ जारी है।
- मास्टरमाइंड: राजस्थान से गिरफ्तार मनीष यादव और अविनाश लांबा को इस पूरे गैंग का सूत्रधार माना जा रहा है।
- बड़ी कार्रवाई: राजस्थान SOG अब तक 45 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले चुकी है। अब CBI उन 13 मुख्य आरोपियों से पूछताछ करेगी, जिन्होंने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को दांव पर लगा दिया।
छात्रों के लिए राहत की बात: क्या होगा आगे?
परीक्षा रद्द होने से छात्रों में आक्रोश तो है, लेकिन सरकार ने कुछ रियायतों का भी ऐलान किया है:
- दोबारा फीस नहीं: नई परीक्षा के लिए छात्रों को एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना होगा।
- वही सेंटर, वही डेटा: दोबारा रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। छात्रों ने जिस सेंटर पर 3 मई को परीक्षा दी थी, संभवतः वहीं दोबारा एग्जाम होगा।
- नई तारीखें: NTA जल्द ही नई परीक्षा की तारीखों का ऐलान करेगा।
देशभर में उबाल, विदर्भ के छात्र बेहाल
इस फैसले से महाराष्ट्र के करीब 2.5 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। विदर्भ के नागपुर, अकोला और अमरावती जैसे शहरों में छात्र और अभिभावक सड़कों पर हैं। 12वीं के बाद डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले युवाओं का कहना है कि सिस्टम की नाकामी की सजा उन्हें क्यों मिल रही है?
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