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Akola: शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल दातकर सहित 11 पदाधिकारी निर्दोष मुक्त; 10 साल पुराने तोड़फोड़ मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला


अकोला: अकोला की राजनीति और न्यायपालिका से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) कार्यालय में तोड़फोड़ और सरकारी काम में बाधा डालने के करीब 10 साल पुराने मामले में शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल दातकर सहित 11 कार्यकर्ताओं को माननीय अदालत ने बड़ी राहत दी है। अकोला के तीसरे जिला एवं सत्र न्यायाधीश तेजवंत सिंह संधू ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया है।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला जनवरी 2016 का है, जब अकोला के दहिहांडा जिला परिषद सर्कल में भीषण पेयजल संकट गहराया हुआ था। पानी की समस्या से त्रस्त होकर 13 जनवरी 2016 को जिला परिषद सदस्य व तत्कालीन शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल दातकर और पंचायत समिति सदस्य गजानन वानखडे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में नागरिक महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता से मिलने पहुंचे थे।

आरोप था कि बैठक के दौरान अधिकारियों के संतोषजनक जवाब न मिलने से प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो गए। इसके बाद कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए गेट पर ताला जड़ दिया गया था।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
इस उग्र आंदोलन के बाद अकोला की सिविल लाइंस पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में निम्नलिखित 11 पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया था, गोपाल दातकर (जिला प्रमुख), गजानन वानखडे (पंचायत समिति सदस्य), अविनाश राउत (सर्कल प्रमुख), गजानन चराटे, अनिल मोहरकार, गोकुल कंडाले, सुधाकर शिरसाट, नीलेश डहाके, गुलाबराव शिरसाट, पांडुरंग पाटकर और सैयद शारिक शामिल है। 

न्यायालय का फैसला और गवाहों की भूमिका

मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष (अभियोजन) ने आरोपियों के खिलाफ कुल 11 गवाह पेश किए थे। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से की गई जिरह में गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। न्यायाधीश तेजवंत सिंह संधू ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि तोड़फोड़, गाली-गलौज और सरकारी काम में बाधा इन्हीं आरोपियों द्वारा उत्पन्न की गई थी। सरकारी काम में बाधा डालने का अपराध सिद्ध करने के लिए जो पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए, वे रिकॉर्ड पर नहीं हैं।

 शिवसेना कार्यकर्ताओं में खुशी
न्यायालय के इस फैसले के बाद शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल दातकर और उनके समर्थकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। कार्यकर्ताओं ने इसे 'सत्य की जीत' बताया है। इस फैसले से आगामी स्थानीय चुनावों से पहले अकोला शिवसेना के लिए एक बड़ी नैतिक जीत मानी जा रही है।