Chandrapur: चिमूर स्थित आश्रमशाला में 500 छात्रों के आधी रात में काटे बाल, तस्वीरें वायरल; अभिभावकों में आक्रोश
चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिमूर स्थित जांभुळघाट शासकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में छात्रों के बाल काटने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि स्कूल में करीब 500 छात्रों के बाल रात के समय काटे गए। इससे पहले कुछ छात्रों की आधी कटिंग किए जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। घटना के बाद अभिभावकों में नाराजगी है और स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
572 छात्र पढ़ते हैं आश्रमशाला में
जांभुळघाट की इस सरकारी आवासीय आश्रमशाला में कक्षा 1 से 11वीं तक करीब 572 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जानकारी के अनुसार, छात्रों के बाल काटने की प्रक्रिया शनिवार दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुई थी। स्कूल प्रशासन की ओर से छात्रों के बाल काटने की व्यवस्था की गई थी।
ट्रिमर की बैटरी खत्म होने से आधी कटिंग
बाल काटने के दौरान ट्रिमर की बैटरी खत्म हो गई। इसके चलते कुछ छात्रों की कटिंग अधूरी रह गई और वे आधे कटे बालों के साथ ही रह गए। इसी दौरान इन छात्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। तस्वीरें सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और स्कूल प्रशासन पर सवाल उठने लगे।
रात 11 बजे दोबारा शुरू हुई कटिंग
तस्वीरें वायरल होने के बाद अधूरी कटिंग पूरी करने के लिए छात्रों के बाल काटने का काम रात में दोबारा शुरू किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे से सुबह 4 बजे तक छात्रों के बाल काटे गए। इस दौरान करीब 500 छात्रों की कटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
स्कूल प्रशासन ने क्या कहा?
आश्रमशाला के अधीक्षक प्रशांत आत्राम ने किसी गलत मंशा से बाल काटे जाने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि छात्रों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से बाल काटे जाते हैं। बारिश के मौसम में यह प्रक्रिया नहीं हो पाई थी। बाद में छात्रों में डैंड्रफ और सिर में खुजली जैसी समस्या को देखते हुए बाल काटने का निर्णय लिया गया।
अधीक्षक के मुताबिक, शुरुआत में ट्रिमर की मदद से कुछ छात्रों के बाल काटे गए, लेकिन बैटरी खत्म होने के कारण काम रोकना पड़ा। इसके बाद आधी कटिंग वाले छात्रों की तस्वीरें वायरल हुईं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद अधूरी कटिंग पूरी करने के लिए रात में दोबारा बाल काटे गए।
अभिभावकों ने उठाए सवाल
घटना के बाद अभिभावकों ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। सवाल उठ रहा है कि छात्रों के बाल रात में काटने का फैसला किसने लिया, क्या इस संबंध में अभिभावकों को जानकारी दी गई थी और क्या छात्रों को इस प्रक्रिया के लिए सहमति में लिया गया था।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से आश्रमशाला में पहुंचकर मामले की जांच करने और छात्रों के स्वतंत्र बयान दर्ज करने की मांग की है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं सवाल
इस घटना के साथ ही आश्रमशाला की व्यवस्था को लेकर पहले सामने आए सवाल भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले भी इस आश्रमशाला में बासी भोजन से छात्रों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया था। ऐसे में अब अभिभावक विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंता जता रहे हैं।
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