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Yavatmal: महावितरण की 'गुंडागर्दी'! चेकिंग के नाम पर मीटरों में तोड़फोड़ और जबरन वसूली


यवतमाल: यवतमाल शहर के व्यापारियों और दुकानदारों में इन दिनों महावितरण के कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि अमरावती गाइडलाइन का हवाला देकर 'वाघेला' नामक कर्मचारी और उनकी टीम दुकानों में घुसकर बिजली मीटरों के साथ छेड़छाड़ कर रही है और उपभोक्ताओं पर जबरन बिजली चोरी का इल्जाम लगाकर लाखों रुपये का जुर्माना ठोक रही है।

दुकानदारों का आरोप है कि महावितरण के कर्मचारी बिना किसी आधिकारिक टेस्टिंग मशीन के बिना मीटर चेक करने का दावा करते हैं। जो मीटर आसानी से नहीं खुलते, उन्हें छेनी और हथौड़े से जबरन तोड़ा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि मीटर की ओरिजिनल सील खुद कर्मचारियों द्वारा तोड़ी जाती है और बाद में उपभोक्ता पर ही 'सील टूटने' या 'मीटर में छेडछाड होने का आरोप लगाकर धारा 135 के तहत जेल भेजने की धमकी दी जाती है।

नियमों को ताक पर रखकर वसूली का खेल शुरु

नियामो के अनुसार, यदि किसी मीटर पर संदेह है, तो उसे लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जाना चाहिए या मौके पर मानक उपकरणों से उसकी रीडिंग की जांच होनी चाहिए। लेकिन बिना किसी तकनीकी रिपोर्ट के सीधे 'बिजली चोरी' का ठप्पा लगाया जा रहा है।

विरोध करने पर कोर्ट-कचहरी और भारी जुर्माने का डर दिखाकर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है जब महावितरण खुद मीटर नहीं बनाती और दूसरी कंपनियों से खरीदती है, तो बिना कंपनी की अधिकृत टेस्ट रिपोर्ट के कर्मचारी यह कैसे तय कर सकते हैं कि मीटर में गड़बड़ी है? क्या मीटर तोड़ना ही इनकी चेकिंग का एकमात्र तरीका है

दुकानदारो में दहशत का माहौल

कर्मचारी वाघेला और उनकी टीम का यह कहना कि "हमें किसी को सूचना देने की जरूरत नहीं, यह हमारा अधिकार है किसी भी जांच की एक निश्चित प्रक्रिया होती है जिसमें पारदर्शिता अनिवार्य है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मांग की है कि ऐसे मनमानी करने वाले कर्मचारियों पर तत्काल उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए और उपभोक्ताओं को न्याय दिलाया जाए।