गोंडवाना यूनिवर्सिटी में पूर्व माओवादी भूपति की नियुक्ति पर विवाद: कुलपति ने दी सफाई, कहा- सिर्फ प्रशासनिक काम, ग्राम सभा ट्रेनिंग की जिम्मेदारी नहीं
गड़चिरोली: गोंडवाना विश्वविद्यालय (GU) के 'एकल ग्राम सभा प्रशिक्षण केंद्र' में आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ 'भूपति' की समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। बढ़ते विरोध के बीच विश्वविद्यालय के कुलपति प्रशांत बोकारे ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा है कि भूपति की तीन महीने की यह जिम्मेदारी केवल कार्यालयीन और प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित है।
कुलपति बोकारे ने स्पष्ट किया कि भूपति को ग्राम सभा सत्र आयोजित करने, प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने या किसी विषय पर मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि यह नियुक्ति एक विज्ञापन, दस्तावेजों की जांच और साक्षात्कार की पूरी आधिकारिक चयन प्रक्रिया के बाद की गई है। यह कोई शैक्षणिक या शिक्षण से जुड़ा पद नहीं है।
महा ग्राम सभा ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
गड़चिरोली जिले के स्थानीय स्वशासी निकायों की संस्था 'महा ग्राम सभा' ने इस नियुक्ति का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा है।
महा ग्राम सभा के सलाहकार और आदिवासी छात्र संघ के पदाधिकारी नंदू नरोटे ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूपति की नियुक्ति रद्द नहीं की गई, तो विश्वविद्यालय तक विशाल विरोध मोर्चा निकाला जाएगा।
'स्थानीय को छोड़ बाहरी को मौका देने का विरोध'
नंदू नरोटे ने कहा कि वे आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भूपति की नियुक्ति कई कारणों से अस्वीकार्य है:
भूपति आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं और उनका पुनर्वास वहीं किया जाना चाहिए; वे गड़चिरोली की 'माटी के लाल' नहीं हैं। गड़चिरोली के स्थानीय निवासी गोपी माडवी का अब तक पुनर्वास नहीं हुआ है, जबकि बाहरी व्यक्ति को मौका दिया गया। पिछले 40 वर्षों के संघर्ष में 250 से अधिक आदिवासी जवान मारे गए हैं। कई ग्रामीण आज भी सिर्फ इसलिए जेलों में हैं क्योंकि उन्होंने कभी भूपति और उनके साथियों को भोजन दिया था, जिसे स्थानीय लोग भूल नहीं सकते।
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