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Nagpur

नागपुर GMC का चमत्कार: 1 फेफड़ा, 1 किडनी और उल्टे दिल वाले युवक का सफल ऑपरेशन, रोबोटिक तकनीक से डॉक्टरों ने रचा इतिहास


नागपुर: मध्य भारत का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, 'नागपुर मेडिकल कॉलेज' (GMC) आए दिन चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसे देखकर देश के बड़े-बड़े नामचीन और निजी कॉर्पोरेट अस्पताल भी दंग रह गए हैं। हाल ही में जीएमसी के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दुनिया की सबसे आधुनिक और बेहद सुरक्षित 'रोबोटिक पल्स फील्ड एब्लेशन' (Robotic Pulse Field Ablation - PFA) तकनीक से एक ऐसा दुर्लभ ऑपरेशन किया गया, जिसने भारतीय चिकित्सा जगत में एक नया मील का पत्थर गाड़ दिया है।

कुदरत का अजीब करिश्मा: शरीर में थे ये बड़े बदलाव

नागपुर का रहने वाला 22 वर्षीय युवक साहिल सहारे एक ऐसी अनोखी शारीरिक संरचना के साथ जी रहा था, जो करोड़ों में किसी एक की होती है। साहिल के शरीर में जन्म से ही केवल एक ही फेफड़ा (Lung) था। शरीर में केवल एक ही किडनी थी। उसका दिल भी सामान्य जगह (बाईं तरफ) न होकर, दाईं ओर फेफड़े के ठीक नीचे छिपा हुआ था।

बचपन में साहिल को कोई खास परेशानी नहीं हुई, लेकिन हाल ही में उसे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। जब वह इलाज के लिए जीएमसी पहुंचा, तो डॉक्टरों की जांच में पता चला कि वह एट्रियल फाइब्रिलेशन (Atrial Fibrillation) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिससे उसका दिल असामान्य रूप से 150 से 160 प्रति मिनट की रफ्तार से धड़क रहा था। इस बीमारी में जरा सी लापरवाही से खून का थक्का दिमाग में फंसने और लकवा (Paralysis) मारने या जान जाने का खतरा था।

क्या है 'रोबोटिक पल्स फील्ड एब्लेशन' (PFA) तकनीक

चूंकि मरीज का दिल बेहद अजीब जगह पर था और शरीर में एक ही फेफड़ा-किडनी थी, इसलिए पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी या पुरानी थर्मल एब्लेशन (गर्मी या अत्यधिक ठंड से नसें जलाने की तकनीक) बेहद रिस्की थी। इसमें आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा था। ऐसे में डॉक्टरों ने भारत की सबसे आधुनिक और सुरक्षित 'रोबोटिक पल्स फील्ड एब्लेशन' (PFA) तकनीक का इस्तेमाल करने का साहसिक फैसला लिया।

क्यों खास है यह तकनीक?

इस आधुनिक तकनीक में बिना किसी चीर-फाड़ के, रोबोटिक कैथेटर की मदद से दिल की गड़बड़ नसों तक पहुंचा जाता है। इसके बाद अल्ट्रा-शॉर्ट इलेक्ट्रिकल पल्स (Ultra-short electrical pulses) छोड़े जाते हैं, जो दिल की धड़कन को बिगाड़ने वाली चुनिंदा कोशिकाओं (Cells) को ही टारगेट कर ठीक करते हैं। इससे दिल के आसपास की अन्य नसों, अन्नप्रणाली (Esophagus) या फेफड़ों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचता।

महज 2 घंटे में डॉक्टरों की टीम ने रचा इतिहास

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए डॉ. सुनील वाष्मीकार (वरिष्ठ सर्जन, कार्डियोलॉजी विभाग) की अगुवाई में विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम बनाई गई। साथ ही, देश के प्रतिष्ठित अस्पताल के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अविनाश वर्मा के विशेष मार्गदर्शन में डॉक्टरों ने इस अत्याधुनिक रोबोटिक PFA तकनीक के जरिए महज 2 घंटे के भीतर इस बेहद जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।

99 प्रतिशत तकनीक सफल

सुपर स्पेलिस्ट के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुनील वाष्मीकार ने कहा, "मरीज की शारीरिक संरचना बेहद जटिल थी। एक लंग्स और एक किडनी के साथ दिल की ऐसी पोजीशन में पुरानी तकनीक से सर्जरी करना जानलेवा हो सकता था। इसलिए हमने 'रोबोटिक पल्स फील्ड एब्लेशन' (PFA) का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की सटीकता 99 प्रतिशत है, जिससे मरीज के अन्य अंगों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए हमने दिल की धड़कन को सामान्य कर दिया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।"

बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को देने के लिए तैयार

नागपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. राज गजभिये ने कहा, "यह नागपुर मेडिकल कॉलेज के इतिहास का सबसे बड़ा और स्वर्णिम दिन है। निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों में इस 'रोबोटिक पल्स फील्ड एब्लेशन' तकनीक से इलाज का खर्च 8 से 10 लाख रुपये तक आता है, जो किसी भी गरीब के बस की बात नहीं है। हमारे डॉक्टरों ने यह कठिन और आधुनिक सर्जरी मुफ्त/किफायती दरों पर कर न केवल रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि हमारा सरकारी अस्पताल अब दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को देने के लिए तैयार है।"