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Nagpur

भारी बारिश में भी नहीं थमा दीक्षाभूमि का आंदोलन, 100 करोड़ के रुके हुए विकास कार्यों को शुरू करने की उठी मांग


नागपुर: ऐतिहासिक दीक्षाभूमि के विकास और विस्तार को लेकर एक बार फिर जन-आंदोलन तेज हो गया है। लगभग दो साल पहले यहां बनाई जा रही अंडरग्राउंड पार्किंग के खिलाफ हुए भारी विरोध और आगजनी के बाद से विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े थे। प्रशासन और सरकार की इस बेरुखी के खिलाफ अब डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के अनुयायी खुद सड़कों पर उतर आए हैं। हाल ही में नागपुर में हुई भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों आंदोलनकारियों ने दीक्षाभूमि परिसर के बाहर एक विशाल 'ह्यूमन चेन' (मानव श्रृंखला) बनाई और रुके हुए निर्माण कार्यों को तुरंत शुरू करने के लिए हुंकार भरी।

जगह की कमी और एग्रीकल्चर विभाग की जमीन की मांग
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा ली गई बौद्ध धर्म की दीक्षा की याद में बने इस पावन स्थल पर हर साल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान स्थिति में यह परिसर अब छोटा पड़ने लगा है, जिसके कारण इसके विस्तार की मांग लंबे समय से की जा रही है। सरकार ने इसके सुंदरीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये का फंड भी मंजूर किया था, लेकिन अंडरग्राउंड पार्किंग के विवाद ने पूरे प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया। अब आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि दीक्षाभूमि से सटी कृषि विभाग (एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट) की जमीन को तुरंत इस परिसर के विस्तार के लिए सौंप दिया जाए, ताकि आने वाले करोड़ों अनुयायियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

'सुंदरीकरण का काम किसी भी हाल में न रुके'
इस पूरे घटनाक्रम पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मेमोरियल कमेटी के अध्यक्ष और धम्म सेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने जिला कलेक्टर और एनएमआरडीए (NMRDA) प्रशासन से बेहद भावुक और सख्त अपील की है। भंते ससाई ने दो टूक शब्दों में कहा कि नेता और वीआईपी आते-जाते रहेंगे और राजनीति चलती रहेगी, लेकिन दुनिया भर में मशहूर दीक्षाभूमि का विकास कार्य किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने प्रशासन को याद दिलाया कि बौद्ध समाज का सबसे बड़ा त्योहार 'धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस' अब से महज चार महीने दूर है, इसलिए सुरक्षा दीवार, मुख्य स्टेज और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए।

इन प्रमुख कामों को तुरंत पूरा करने का अल्टीमेटम:
  • सुरक्षा दीवार: पूरे दीक्षाभूमि परिसर को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण।
  • 56 फीट की बुद्ध प्रतिमा: तथागत गौतम बुद्ध की चलती हुई मुद्रा वाली ऐतिहासिक 56 फीट ऊंची मूर्ति के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म।
  • थीम-बेस्ड लाइटिंग: मुख्य स्तूप और बोधि वृक्ष के आसपास सोलर पावर से चलने वाली आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था।

आंतरिक गुटबाजी और बुद्धिजीवियों की एकजुटता
एक तरफ जहां प्रशासन की सुस्ती से काम रुका हुआ है, वहीं दूसरी तरफ दीक्षाभूमि मेमोरियल कमेटी के ट्रस्टियों के बीच आपसी गुटबाजी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कमेटी के चेयरमैन भंते सुरई ससाई और सेक्रेटरी राजेंद्र गवई के दो अलग-अलग गुटों के आपसी मतभेदों के कारण भी विकास कार्यों की रफ्तार पर असर पड़ा है, जिसकी समाज में कड़ी आलोचना हो रही है। हालांकि, अब दोनों गुट विकास के मुद्दे पर एक सुर में बात कर रहे हैं।