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Maharashtra

महाराष्ट्र में अवैध IVF और लिंग जांच रैकेट पर लगेगा 'मकोका', स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर का विधानसभा में बड़ा ऐलान


मुंबई: महाराष्ट्र में बिना लाइसेंस चल रहे इन-व्हिट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) केंद्रों, अवैध सोनोग्राफी और भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस तरह के अवैध धंधों और संगठित रैकेट में शामिल अपराधियों पर अब सीधे 'महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून' (MCOCA/मोक्का) के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में घोषणा की कि आगामी सत्र में इस कड़े कानून को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किए जाएंगे। राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जिसमें राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दे गूंजे।

अवैध IVF और सोनोग्राफी सेंटरों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
सदन में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी और अन्य सदस्यों ने राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहे बिना लाइसेंस वाले IVF केंद्रों और सोनोग्राफी के जरिए होने वाले लिंग परीक्षण का मुद्दा उठाया था। सदस्यों ने मांग की कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इस खेल को तुरंत रोका जाए।

इस पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दो बड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया। 

  • मोक्का (MCOCA) की कार्रवाई: भ्रूण लिंग जांच और अवैध IVF सेंटरों के जरिए चलने वाले संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए मौजूदा कानूनों को और सख्त बनाया जाएगा। अगले सत्र में इसके तहत मोक्का लगाने का प्रावधान जोड़ दिया जाएगा।

  • विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force): PCPNDT (गर्भधारण पूर्व और प्रसूतिपूर्व निदान तकनीक) अधिनियम के सख्त कार्यान्वयन और IVF व सोनोग्राफी केंद्रों की औचक जांच के लिए राज्य स्तर पर एक 'विशेष कार्य बल' (टास्क फोर्स) का गठन किया जाएगा।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर विजय वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा
प्रश्नकाल के दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने ग्रामीण इलाकों की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का ध्यान खींचा। वडेट्टीवार ने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, "ब्रह्मपुरी के अस्पताल को 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में अपग्रेड तो कर दिया गया है, लेकिन 83 पदों को भरने की मंजूरी का प्रस्ताव पिछले दो साल से मंत्रालय में धूल फांक रहा है। इमारत खड़ी है, पर स्टाफ न होने से मरीजों का बुरा हाल है। राज्य में कई अस्पतालों का 50 से 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन वे सिर्फ फंड की कमी से रुके हुए हैं। सरकार इन्हें तुरंत बजट दे। इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर 40 से 50 गांवों का बोझ होता है, उनका मौजूदा 1.60 करोड़ का फंड बेहद कम है, इसे बढ़ाकर कम से कम 5 करोड़ रुपये किया जाए।"

वडेट्टीवार ने कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सेविकाओं, चपरासियों और संविदा कर्मचारियों के बकाया भत्ते और मानदेय का भुगतान भी जल्द से जल्द करने की मांग की।

1,400 डॉक्टरों की जल्द होगी भर्ती
विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने ब्रह्मपुरी सहित राज्य के कई अस्पतालों में खाली पदों की बात स्वीकार की। स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को भरोसा देते हुए कहा, "नेशनल डॉक्टर्स डे' के मौके पर राज्य में 1,400 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नए स्वीकृत पदों पर जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी। जिन स्वास्थ्य परियोजनाओं का 50 से 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर फंड दिया जाएगा। इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ताओं और संविदा कर्मचारियों के लंबित भत्तों और भुगतानों को निपटाने के लिए जल्द ही एक सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।"