प्रकाश अंबडेकर का बड़ा दावा, कहा- भाजपा एनसीपी-उद्धव को कमजोर करने में लगी, दो-तीन महीने में होगा बड़ा धमाका
नागपुर: वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने भारतीय जनता पार्टी को लेकर बड़ा दावा किया है। शुक्रवार को नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए आंबडेकर ने कहा कि, "आने वाले दो-तीन महीने में भाजपा और आरएसएस एक बार फिर एनसीपी को तोड़ने का प्रयास करेगी। उसकी मंशा साफ़ है की एनसीपी को कमजोर किया जाए। जिससे 2024 के सभी 48 सीटों पर जीत हासिल हो सके।"
आंबेडकर ने कहा, "कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पहले अमित शाह महाराष्ट्र आये थे और लोकसभा की सभी 48 सीटों को जितने की बात कही। इसके बाद से ही एनसीपी में उठापठक शुरू हो गई। तीन महीने से पहले लोग कह रहे थे बीजेपी कर्नाटक में नहीं लौटने वाली। जेडीएस ने खुद को छह जिलों में रोका अपने मतदाताओं को जो करना है करने दो ऐसा कहा। जिसका फायदा कांग्रेस को उस चुनाव में मिला। कर्नाटक में होने वाली हार को देखते हुए शाह ने अपना पूरा फोकस महाराष्ट्र में किया।"
वंचित प्रमुख ने कहा, “कांग्रेस के नाना पटोले ने अपने दम पर मनपा चुनाव लड़ने की बात कही और एनसीपी-शिवसेना एक साथ। पिछले दिनों शालिनी पाटिल ने एनसीपी को लेकर बड़ी बात कही थी। सभी को पता है एनसीपी ने नेता कितने ईडी के मामंलो में फंसे हुए हैं। वहीं अगर बयान का सार देखें तो यही निकलता है कि, जेल या बेल।”
एनसीपी और महाविकास अघाड़ी को कमजोर करना
आंबेडकर ने कहा, “आने वाले तीन महीने में बीजेपी और आरएसएस अपनी पुराणी चला फिर करेगी। एनसीपी कई ईडी तो कई नाबार्ड के अंदर है। इस कारण वहां क्या होगा यह देखा ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। इंडिपेंडेंट का जो पेंच है अगर बीजेपी ने कहा तो एनसीपी के नेता क्या करेंगे ये देखा होगा। इसका मकसद केवल एनसीपी को कमजोर करना है।” उन्होंने आगे कहा, “पार्टी और गठबंधन में दुरी पैदा करना यह भाजपा का मुख्य एजेंडा अभी दिखाई दे रहा है।” इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, “महाराष्ट्र में अगस्त महीने के पहले तक कोई स्थिरता नहीं आएगी।”
खुद को पार्टी नहीं कर सकते साबित
उद्धव ठाकरे को लेकर आंबडेकर ने कहा, “उद्धव ठाकरे का जो गुट जो है वह अभी खुद को पार्टी के रूप में पंजीयन नहीं कर सकते। अगर वह ऐसा करने के लिए गया तो सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय दिया है वह पूरी तरह धूमिल हो जायेगा। सुप्रीम कोर्ट की माने तो भारत गोगावले का नहीं उद्धव ठाकरे का व्हिप चलेगा। अगर वह खुद को पार्टी के रूप में पंजीयन कराएंगे तो यह साबित हो जायेंगे की वह शिवसेना से अलग है, जो वर्तमान अभी एकनाथ शिंदे के पास है। इसके बाद उद्धव ठाकरे को नए चिन्ह और नाम से मैदान में जाना पड़ेगा।”
admin
News Admin