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Nagpur

नागपुर में SIR अभियान से हड़कंप, मतदाता सूची से हटने जा रहे करीब 6 लाख नाम!


नागपुर: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नागपुर जिले में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन करने की व्यापक प्रक्रिया जारी है। प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, जिले में लगभग 5.95 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने (Deletion) की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे भौतिक सत्यापन के पूरा होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

क्यों हटाए जा रहे हैं इतनी बड़ी संख्या में नाम?
निर्वाचन प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर विसंगतियां और त्रुटियां सामने आई हैं। मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारणों से नामों को सूची से पृथक किया जा रहा है:

  • मृत मतदाताओं के नाम दर्ज होना: कई ऐसे मतदाताओं के नाम अब भी मतदाता सूची में शामिल थे, जिनका निधन हो चुका है लेकिन उनके परिजनों या स्थानीय स्तर पर विलोपन का आवेदन दाखिल नहीं किया गया था।
  • दोहरी प्रविष्टियां (डुप्लीकेट नाम): एक ही मतदाता के नाम अलग-अलग पतों, विधानसभा क्षेत्रों या बूथों पर दर्ज पाए गए हैं।
  • स्थायी रूप से स्थानांतरित नागरिक: जो मतदाता रोजगार, व्यवसाय या अन्य कारणों से अपना पुराना निवास स्थान छोड़कर दूसरे शहरों या राज्यों में बस चुके हैं।

अभियान की कार्यप्रणाली और सर्वे की चुनौतियां
नागपुर जिले के 12 विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत कुल 46 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से अब तक 32 लाख से अधिक मतदाताओं का विवरण मैपिंग और सत्यापन प्रक्रिया के तहत जांचा जा चुका है। BLO द्वारा घर-घर जाकर आवेदन फॉर्म वितरित करने और जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने का कार्य किया जा रहा है।

हालांकि, कई इलाकों में नागरिकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ बूथों पर BLO के न पहुंचने से मतदाता अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं, जिससे उनका नाम कटने की आशंका उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गलत जानकारी देने या जानबूझकर तथ्य छिपाने पर विधिक प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

विपक्ष का रुख और प्रशासनिक समय-सारणी
इस अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सर्वेक्षण में ढिलाई के कारण वास्तविक नागरिक भी मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया है कि प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची का प्रकाशन करने के बाद नागरिकों को दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा, जिससे किसी भी वैध मतदाता का नाम गलती से न छूटे।