अब हर कृषि भूखंड को मिलेगा 'भू-आधार' क्रमांक; भूमि विवाद कम होंगे, किसानों को बीमा और ऋण में आसानी
नागपुर/मुंबई: राज्य सरकार ने कृषि भूमि के सभी हिस्सों को ‘भू-आधार’ क्रमांक देने की योजना की घोषणा की है। इससे किसानों को खेती, ऋण, बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और भूमि विवाद कम होंगे।
राजस्व विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि के नक्शों और सातबारा में मौजूद विसंगतियों को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के नेतृत्व में राज्य की कृषि भूमि के उप-हिस्सों का नापजोख कर नक्शों और सातबारा को अपडेट करने का निर्णय लिया गया है।
इस योजना के तहत प्रत्येक भूखंड को ‘भू-आधार क्रमांक’ प्रदान किया जाएगा, जो आधार कार्ड की तरह भूमि से जुड़ी सभी जानकारियों को एक नंबर पर उपलब्ध कराएगा। इससे फसल बीमा, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ लेना और भूमि विवादों का समाधान आसान होगा।
राज्य में वर्ष 1890 से 1930 के बीच पहली भूमिप्रमाणन प्रक्रिया हुई थी। इसके बाद 1992 से दिसंबर 2024 तक खरीदी-बिक्री, वारिस हक और बंटवारे के कारण 2,12,76,499 नए हिस्से तैयार हुए हैं। अब इन हिस्सों का प्रत्यक्ष नापजोख होने से सरकारी नक्शों और सातबारा में तालमेल बैठ जाएगा।
इस परियोजना की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर उप मुख्य सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। जिले और तहसील स्तर पर संबंधित अधिकारी इस काम की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे और निजी सर्वेक्षण एजेंसियों की सहायता भी ली जाएगी।
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