नागपुर में कचरा संकलन व्यवस्था फिर चर्चा में, भाजपा की सत्ता वापसी के बाद जोनवार एजेंसियों की नियुक्ति पर बहस तेज
नागपुर: मनपा में भाजपा की सत्ता स्थापित होने के बाद से फिर एक बार जोनवार कचरा संकलन करने के लिए कंपनियों की नियुक्ति की चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व पार्षदों की शिकायतें, कचरा संकलन व्यवस्था में खामियां और जुर्माने की कार्रवाई अब भी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। अब यह देखने वाली बात होगी कि मनपा नई एजेंसियों की नियुक्ति का प्रस्ताव पेश करती है या मौजूदा कंपनियों की व्यवस्था को और पुख्ता करने पर जोर देती है।
मनपा क्षेत्र में कचरा संकलन व्यवस्था लंबे समय से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वर्तमान में जोन-एक से पांच तक एजी एन्वायरो और जोन छह से दस तक बीवीजी इंडिया कचरा संकलन की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान में पिछड़ने के कारण मनपा प्रशासन ने दोनों कंपनियों से हर महीने कुल बिल का 10 प्रतिशत जुर्माना वसूल किया है। यह राशि लगभग 70 लाख रुपए हो चुकी है, जिसका उपयोग अब तक कचरा वाहन खरीदने और मौजूदा वाहनों को मानकों के अनुरूप सुधारने में किया गया है। आगामी योजना के तहत 50 और वाहन खरीदने की तैयारी है।
पूर्व अतिरिक्त आयुक्त रवींद्र कुंभारे मनपा के हाथों कचरा संकलन की व्यवस्था रखने के पक्ष में थे, लेकिन बाद में सत्तारुढ़ भाजपा ने दो एजेंसियों को नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया और मनपा सदन में इसे मंजूरी मिल गई। नागरिकों का मानना है कि जोनवार एजेंसी नियुक्ति ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि कचरा संकलन की प्रक्रिया को पुख्ता करना और प्रशासनिक कदम उठाना जरूरी है।
हालांकि, मनपा आयुक्त डॉ. अभिजित चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जोनवार एजेंसी नियुक्त करना व्यावहारिक नहीं है और सभी कंपनियों पर समान रूप से नजर रखना भी मुश्किल होगा।
2008 से 2019 तक शहर की कचरा संकलन व्यवस्था कनक रिसोर्सेस कंपनी के तहत थी। 2019 में भाजपा शासन के दौरान एजी एन्वायरो और बीवीजी इंडिया को पांच-पांच जोन में कचरा संकलन की जिम्मेदारी दी गई। अब भाजपा की सत्ता लौटने के बाद यह चर्चा फिर से गर्म हो गई है कि क्या नई एजेंसियों को जोनवार नियुक्त किया जाए या मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत की जाएगी या पुरानी कंपनियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाएगा।
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