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अपनी ही सरकार पर भड़के सुधीर मुनगंटीवार, वन मंत्री गणेश नाईक को लगाई फटकार; जानें पूरा मामला


चंद्रपुर: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विधायक सुधीर मुनगंटीवार (Sudhir Mungantiwar) पिछले कुछ दिनों से लगातार गाहे बगाहे अपनी सरकार पर हमलावर है। मुनगंटीवार किसी न किसी मुद्दे पर सरकार को आधे हाथ ले रहे हैं। बुधवार को एक बार फिर मुनगंटीवार ने सरकार को घेरा, न केवल घेरा बल्कि निर्णय को लेकर मंत्री गणेश नाइक (Ganesh Naik) को फटकार भी लगाई। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच नोक-झोक भी दिखाई दी।

दरअसल, राज्य में महागठबंधन सरकार ने पेड़ों की कटाई को लेकर एक अहम फैसला लिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि पेड़ों की कटाई करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, उस समय तत्कालीन वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार थे। वन विभाग ने बिना अनुमति के जंगल काटने वालों के लिए यह बड़ा कदम उठाया था। क्योंकि, पहले पेड़ काटने वालों पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता था। हालांकि, सुधीर मुनगंटीवार के कार्यकाल में हुए इस फैसले को अब वापस ले लिया गया है। वन मंत्री गणेश नाईक के सुझाव पर इस फैसले को वापस लिया गया है।

पेड़ों को काटने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने संबंधी सरकारी निर्णय को वापस लेने के बारे में चर्चा में पूर्व वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने वन मंत्री गणेश नाइक को खरी-खोटी सुनाई। मुनगंटीवार ने कहा, "पता नहीं वन मंत्री इस विधेयक को वापस लेने के लिए क्यों कह रहे हैं। दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या है, गांव-गांव में पेड़ों को काटने की एक तरह की होड़ लगी हुई है। मौजूदा निर्णय के अनुसार ऐसा नहीं है कि पेड़ों को काटा नहीं जा सकता, केवल अनुमति लेनी होगी। लेकिन, मंत्री इस विधेयक को वापस लेने के लिए क्यों कह रहे हैं? ऐसा सवाल भी पूछा।

नए बदलाव के साथ कानून लाएंगे: वन मंत्री
विधेयक पर चर्चा में बोलते हुए गणेश नाईक ने कहा कि, "इस विधेयक में पेड़ की टहनियों को काटना भी पेड़ काटने के समान है। अगर पेड़ काटा जाता है तो 50 हजार रुपये का जुर्माना है। अगर किसान अनजाने में पेड़ काटते हैं तो भी 50 हजार रुपये का जुर्माना है। नाईक ने कहा कि किसी को लाभ पहुंचाने के लिए यह विधेयक वापस नहीं लिया जा रहा है। साथ ही सुधीरभाऊ की मंशा पर कोई संदेह नहीं है। लेकिन, इस कानून को अस्थायी रूप से वापस लिया जा रहा है। वन मंत्री नाईक ने सदन में चर्चा में यह भी जानकारी दी कि वे नए बदलाव के साथ कानून लाएंगे।"