logo_banner
Breaking
  • ⁕ केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, मुख्यमंत्री फडणवीस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुए सहभागी ⁕
  • ⁕ गढ़चिरोली में 11 बड़े माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, माओवादिओं पर 68 लाख रुपये के थे इनाम ⁕
  • ⁕ Buldhana: कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं के साथ कई जगह गिरे ओले, आम, केला, अंगूर के बागों को नुकसान ⁕
  • ⁕ Gadchiroli: अतिदुर्गम बंगाडी में केवल 24 घंटे में स्थापित किया गया नया पुलिस सहायता केंद्र ⁕
  • ⁕ सोलर ग्रुप ने पिनाका एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट का किया पहला सफल परीक्षण, 45 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले 24 रॉकेटों का परीक्षण ⁕
  • ⁕ Nagpur: एमआईडीसी में पिस्टल की नोक पर बार में लूट, कुख्यात अजीत सातपुते गैंग सहित 6 गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ मराठी भाषा नहीं पढ़ना स्कूलों को पड़ेगा भारी, ऐसे स्कूलों की मान्यता होगी रद्द; मंत्री दादा भूसे का ऐलान ⁕
  • ⁕ Ramtek: नवरगांव स्थित टूरिस्ट ढ़ाबा के कुक की छह माह बाद मिली लाश, पुलिस ने ढ़ाबे के 4 कर्मचारियों को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Wardha: आपूर्ति विभाग की बड़ी कार्रवाई, हजारों टन अवैध गेहूं-चावल जब्त, बजरंग दल की सतर्कता से गोदाम सील ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Amravati

Amravati: 6.67 लाख मतदाताओं ने वोट से मोड़ा मुंह, शहरी वोटर्स का अनुपात अधिक


अमरावती: लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान जरूरी है। वस्तुतः यह एक राष्ट्रीय कर्तव्य माना जाता है। हालांकि हकीकत ये है कि 26 अप्रैल को हुए लोकतंत्र के इस महापर्व से 6,66,957 मतदाताओं ने मुंह मोड़ लिया। इसमें शहरी मतदाताओं का अनुपात अधिक है। 

अमरावती लोकसभा क्षेत्र में 18,366,078 मतदाता हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम में इस बार मतदाता सूची को शुद्ध बनाया गया और सूची में अनावश्यक गड़बड़ी को कम किया गया।

कहा गया कि इससे प्रतिशत बढ़ेगा। इस हिसाब से 63.67 फीसदी वोटिंग हुई। इसके अलावा, ग्रामीण दरियापुर, अचलपुर और मेलघाट निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह बादल छाए रहने और मतदाताओं में उत्साह के साथ-साथ देर रात तक मतदान हुआ। इसके परिणामस्वरूप तीन दशकों में पहली बार सबसे अधिक मतदान हुआ। हालांकि, शहरी मतदाताओं का प्रतिशत घटा है। 

इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि मतदान के दिन सरकारी छुट्टी और फिर लगातार दो दिनों की छुट्टी के कारण कई मतदाताओं ने मतदान छोड़ दिया और दौरे को प्राथमिकता दी। अनुसूचित जाति, जनजाति और मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है। उसकी तुलना में अन्य क्षेत्रों में वोटिंग कम हुई है।