Chandrapur: आयुक्तों की उदासीनता से मनपा का कामकाज ठप, अविश्वास की तैयारी
- पवन झबाडे
चंद्रपुर: मनपा में पहली बार किसी ‘आईएएस’ अधिकारी की आयुक्त के रूप में नियुक्ति होने के बाद शहरवासियों को उम्मीद थी कि शहर के विकास को नई गति मिलेगी। लेकिन कुछ ही महीनों में यह उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। आयुक्तों के उदासीन रवैये के कारण मनपा प्रशासन पूरी तरह चरमराने की स्थिति में पहुंच गया है। एक ओर शहर में पानी आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और घनकचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।
महापालिका में लगातार तीन वर्षों से अधिक समय तक प्रशासक राज रहा। इसके बाद जनवरी 2026 में आम चुनाव हुए और नए नगरसेवक सभागृह में पहुंचे। इसी दौरान आईएएस दर्जे के आयुक्त अकुनुरी नरेश की नियुक्ति होने से शहर के कायापलट की उम्मीद जगी थी। लेकिन नगरसेवकों का पांच महीने का कार्यकाल बीत जाने के बावजूद और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध होने के बाद भी केवल ‘प्रशासकीय मंजूरी’ के अभाव में फाइलें धूल खा रही हैं। विकास कार्य ठप होने से नागरिक अब नगरसेवकों से जवाब मांग रहे हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है।
फाइलों का ढेर बढ़ा, ठेकेदार भी परेशान
महापालिका के कई विभाग प्रमुखों की टेबल पर फाइलों का अंबार लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार आयुक्त इन फाइलों को आगे बढ़ाने या उन पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हैं। आयुक्तों की इस ‘रेड टेपिज्म’ और उदासीनता के कारण शहर के कई महत्वपूर्ण बुनियादी विकास कार्य अटक गए हैं। मनपा के ढीले-ढाले कामकाज से परेशान होकर अब कोई भी नामी ठेकेदार महापालिका के काम लेने को तैयार नहीं है। इसका सीधा असर शहरवासियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।
आयुक्त गायब, जांच रिपोर्ट अटकी
नाले सफाई का ठेका प्राप्त करने वाली ‘संत मीराबाई सेवा सहकारी संस्था’ के कामकाज में बड़े पैमाने पर अनियमितता होने का आरोप स्थायी समिति के सदस्यों ने लगाया था। इस मामले की जांच के लिए गठित समिति ने एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे स्थायी समिति की बैठक में पेश किया जाना था। इस रिपोर्ट में क्या खुलासे हैं, इस पर पूरे शहर की नजरें टिकी थीं। लेकिन स्थायी समिति की बैठक के समय आयुक्त अकुनुरी नरेश के अनुपस्थित रहने के कारण यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट समिति के सामने पेश नहीं हो सकी। इससे नाराज स्थायी समिति सभापति ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बैठक ही रद्द कर दी।
आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
नगरसेवकों की मांगों और प्रभागों की समस्याओं को आयुक्त द्वारा लगातार नजरअंदाज किए जाने से अब जनप्रतिनिधियों का सब्र टूटता नजर आ रहा है। कई नगरसेवक अब दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आयुक्त के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं और उनके विरुद्ध सीधे ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। फिलहाल विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू है, लेकिन इसके समाप्त होते ही होने वाली पहली बैठक में इस मुद्दे पर बड़ा हंगामा होने और मनपा में राजनीतिक भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है।
उपमहापौर प्रशांत दानव ने क्या कहा?
उपमहापौर प्रशांत दानव ने कहा कि, “मनपा को आईएएस आयुक्त मिलने से हमें उम्मीद थी कि उनके सहयोग से शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी। मनपा के पास पर्याप्त निधि उपलब्ध है और जनता के कई मुद्दे लंबित हैं, लेकिन आयुक्त के हस्ताक्षर न होने से फाइलों का ढेर जमा हो गया है। इसके कारण अधिकांश विकास कार्य ठप पड़े हैं।”
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