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जिला बैंक अध्यक्ष बच्चू कडू को सहकारिता विभाग का नोटिस, विभागीय संयुक्त पंजीयक ने 24 फरवरी तक मांगा जवाब


अमरावती: सत्तारूढ़ दल ने उपनियमों में सुझाए गए संशोधनों को अस्वीकार नहीं किया, लेकिन अपने पांच निदेशकों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब विपक्ष ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष, पूर्व विधायक बच्चू कडू पर निशाना साधा है। उनकी एक याचिका पर जिला संयुक्त रजिस्ट्रार ने अध्यक्ष बच्चू कडू को निदेशक पद से अयोग्य घोषित करने का नोटिस जारी किया है, जिससे जिले के सहकारी क्षेत्र में खलबली मची है।

बच्चू कडू के जिला मध्यवर्ती बैंक की बागडोर संभालने के बाद, पूर्व अध्यक्ष बबलू देशमुख के समूह ने सत्तारूढ़ दल के खिलाफ शिकायतें दर्ज करना शुरू कर दिया। सत्तापक्ष द्वारा लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों के खिलाफ मंडलीय संयुक्त निबंधकों के साथ यह उनका समूह ने सहकारिता मंत्री से लेकर हाईकोर्ट तक का सफर किया। 

पिछले महीने सत्तारूढ़ दल द्वारा सुझाए गए उपनियमों में संशोधन को बबलू देशमुख समूह द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद खारिज कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद जैसे ही कोर्ट ने सत्ता पक्ष के पांच निदेशकों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को हरी झंडी दिखायी, विभागीय सह निदेशकों ने 14 फरवरी को अविश्वास प्रस्ताव के लिए विशेष बैठक बुलाई है।

इस बीच, बबलू देशमुख समूह के निदेशक हरिभाऊ मोहोड ने 11 निदेशकों के साथ बच्चू कडू को बैंक निदेशक के पद से अयोग्य घोषित करने के लिए याचिका दायर की। इसमें उन्होंने सबूत दिया था कि नासिक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उन्हें एक मामले में एक साल की सजा सुनाई थी।

उपविधि में ऐसा प्रावधान है कि जिन निदेशकों को बैंक के उपनियमों के तहत एक वर्ष से अधिक की सजा हुई है, वे पद के लिए अयोग्य हैं। इन नियमों के आधार पर विभागीय संयुक्त पंजीयक ने “आपको अयोग्य क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए, और आपको अगले पांच वर्षों के लिए उक्त पद धारण करने से अयोग्य क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए”, ऐसा नोटिस बैंक अध्यक्ष बच्चू कडू को भेजा है।

नोटिस में कहा गया है कि कारण बताने के लिए यदि वे मौखिक बयान देना चाहते हैं, तो उन्हें 24 फरवरी को दोपहर 3 बजे अपनी गवाही दर्ज करने के लिए व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होना होगा। यदि समय सीमा के भीतर आवश्यक साक्ष्यों के साथ संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया जाता है या सुनवाई में वह अनुपस्थित रहते हैं और प्रस्तुत मामले में कुछ भी कहना चाहते हैं तो इसे ध्यान में रखते हुए आगामी निर्णय लिया जाएगा।