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Nagpur

Empress Mill: रतन टाटा के जीवन की वो अधूरी कहानी, जिसे दोबारा खड़ा न कर पाने का रहा जिंदगी भर मलाल


रतन टाटा (Ratan Naval Tata)… जिन्होंने अपनी मेहनत और सादगी से टाटा समूह (Tata Group) को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, अब हमारे बीच नहीं रहे। नागपुर से उनका संबंध भी गहरा था। टाटा पिछले आठ सालो में दो बार नागपुर (Nagpur) पहुचे. टाटा ने 18 अप्रैल 2016 और 28 दिसंबर 2019 को नागपुर के रेशमबाग स्थित आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया. और हर बार संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) से मुलाकात की। संघ 2019 में उनकी और भागवत की बैठक खास चर्चा में रही थी।

रतन टाटा का नागपुर से जुड़ाव सिर्फ आरएसएस तक ही सीमित नहीं था. बल्कि रतन टाटा का नागपुर से एक भावनात्मक जुड़ाव भी था। 1977 में उन्हें टाटा समूह की एम्प्रेस मिल का जिम्मा सौंपा गया। यह मिल तब नुकसान में चल रही थी, लेकिन रतन टाटा ने इसे बचाने की भरपूर कोशिश की। कई बार निवेश भी किया। हालांकि, उसके बावजूद कंपनी घाटे में चलती रही। इसे दोबारा शुरू करने के लिए एक बार फिर से निवेश का रास्ता अपना गया। हालांकि, पर्याप्त फंड न जुटा पाने के कारण, 1986 में एम्प्रेस मिल (Empress Mill) को बंद करना पड़ा।

यह फैसला रतन टाटा के लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखद था। एक इंटरव्यू में रतन टाटा ने कहा था कि, "एम्प्रेस मिल को चलाने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपये की जरूरत थी, लेकिन यह रकम जुटा पाना उस समय मुश्किल हो गया।" इस घटना ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला और अपने इस अधूरे अरमान पर वे अपने आख़िर पड़ाव पर भी मलाल करते रहे है. 

हालांकि, रतन टाटा ने इस घटना के बाद हार नहीं मानी और टाटा समूह को एक नए मुकाम पर पहुंचाया। नागपुर के इस जुड़ेपन ने रतन टाटा को इस शहर के दिल के करीब बना दिया था। रतन टाटा का निधन उद्योग जगत और उनके प्रशंसकों के लिए एक बड़ा धक्का है। उनके आदर्श, सादगी और नागपुर से जुड़ी उनकी यादें हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेंगी।