Gondia: मनरेगा के संविदा इंजीनियरों और कर्मचारियों का कामबंद आंदोलन, सरकारी सेवा में समायोजन करने की मांग
गोंदिया: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत संविदा इंजीनियरों और कर्मचारियों ने 23 जनवरी से कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें सरकारी सेवा में समायोजित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके चलते ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के कई काम ठप हो गए हैं।
पिछले 20 वर्षों से मनरेगा योजना लागू है, लेकिन इस योजना को जमीन पर उतारने वाले संविदा इंजीनियर और कर्मचारी आज भी बेहद कम मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं। कर्मचारियों की मांग है कि अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह उन्हें भी सरकारी सेवा में शामिल किया जाए। महाराष्ट्र मनरेगा समन्वयक, कार्यक्रम प्रबंधक, कार्यक्रम अधिकारी, पैनल तकनीकी अधिकारी, क्लर्क कम डाटा एंट्री ऑपरेटर संघटना ने यह मांग शासन के सामने रखी है।
हाल ही में मनरेगा योजना का नाम बदलकर वी बीजी रामजी किया गया है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि नाम बदलने से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं होता। पिछले २० वर्षों से उनके विकास की ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रोजगार गारंटी योजना जहां ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देती है, वहीं इस योजना को चलाने वाले कर्मचारियों के अपने रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उम्र बढ़ने के कारण कई कर्मचारियों को काम से हटाया जा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें सरकारी सेवा में समायोजित नहीं किया गया, तो 2 फरवरी से मुंबई में राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे ।
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