सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि कर्ज वसूली पर लगी रोक, महाराष्ट्र सरकार ने जीआर किया जारी; ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए 6,728 करोड़ की व्यवस्था
मुंबई: महाराष्ट्र में सूखे का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि ऋण की वसूली पर रोक लगाने के साथ पुराने फसल ऋण के पुनर्गठन और नए फसल ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए 6 हजार 728 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों को राज्य सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। शासनादेश जारी कर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि ऋण की वसूली पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही पुराने फसल ऋण का पुनर्गठन कर आगामी खरीफ सीजन के लिए किसानों को नया फसल ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश बैंकों को दिए गए हैं।
सरकार के फैसले के अनुसार, शुरुआत में 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया गया था। इसके बाद 43 और तहसीलों को इसमें शामिल किया गया, जिसके बाद कुल 308 तहसीलों में सूखे से संबंधित राहत उपाय लागू किए गए हैं। पुराने फसल ऋण के पुनर्गठन की प्रक्रिया 30 अप्रैल 2027 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सूखे की स्थिति में किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव नहीं बनाने की स्पष्ट हिदायत बैंकों और सहकारी ऋण संस्थाओं को दी गई है।

सूखे का असर किसानों के बच्चों की पढ़ाई पर न पड़े, इसके लिए सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत 6 हजार 728 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इस राशि से सिंचाई कार्य, पशु शेड, सार्वजनिक तालाबों की मरम्मत, फल एवं बांस की खेती, बोरवेल रिचार्ज, प्रधानमंत्री आवास योजना और रेशम उद्योग के लिए शेड निर्माण जैसे विभिन्न कार्य किए जाएंगे।
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