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Maharashtra

परिसीमन बिल पर शरद पवार करेंगे मोदी सरकार का समर्थन! खबरों पर सांसद सुप्रिया सुले ने बताई सच्चाई, कहा-....ये हुआ हमारा समर्थन


मुंबई: संसद का माँनसून सत्र जल्द शुरू होने वाल है। सत्र में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार कई प्रमुख बिलों को पेश करने वाली है। जिसमें सबसे बड़ा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल है। इन्हीं चर्चाओं के बीच आज खबर चली जिसमें यह दावा किया गया कि, शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बिल का समर्थन कर सकती है। वहीं अब इन दावों पर पार्टी का आधिकारिक बयान सामने आ गया है। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए इसे महज 'सूत्रों के हवाले से उड़ी अफवाह' करार दिया है। बुधवार को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुले ने साफ किया कि उनकी पार्टी ने इस पर अभी कोई आधिकारिक रुख तय नहीं किया है। 

अफवाहों पर सुप्रिया सुले की सफाई

सुप्रिया सुले ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों के कारण महाविकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगियों में कोई गलतफहमी न पैदा हो, इसलिए उन्होंने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने कहा, "सुबह से खबरें चल रही हैं कि हमारी पार्टी ने परिसीमन बिल का समर्थन किया है। यह सब सूत्रों पर आधारित है। NCP (शरदचंद्र पवार) ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है।"

सुले ने बताया कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले शिवसेना नेता संजय राउत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और सतेज (बंटी) पाटिल से फोन पर बात कर हकीकत साफ कर दी है ताकि गठबंधन में कोई भ्रम न रहे।

नया बिल देखने के बाद ही तय होगी भूमिका

पार्टी के रुख पर बात करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, "नया परिसीमन बिल अभी तक हमारे हाथ में नहीं आया है। जब तक आधिकारिक ड्राफ्ट सामने नहीं आता, तब तक कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। बिल आने के बाद हम 24 घंटे के भीतर इसका गहराई से अध्ययन करेंगे और अपनी भूमिका तय करेंगे।"

अमित शाह का '50% सीट बढ़ोतरी' का फॉर्मूला क्या था?

सुप्रिया सुले ने दिल्ली की एक इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए बताया कि कुछ महीने पहले गृह मंत्री अमित शाह और तत्कालीन कानून मंत्री किरण रिजिजू ने उन्हें, अरविंद सावंत (ठाकरे गुट) और असदुद्दीन ओवैसी को एक विशेष बैठक के लिए बुलाया था। केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होने का डर था, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है। इसलिए सभी इसका विरोध कर रहे थे। इसका समाधान निकालते हुए अमित शाह ने प्रस्ताव दिया था कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में सीधे 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी जाए।

महाराष्ट्र में कैसे बदलता गणित?

सुप्रिया सुले ने इस फॉर्मूले को समझाते हुए बताया: महाराष्ट्र में फिलहाल लोकसभा की 48 सीटें हैं। 50% बढ़ोतरी के हिसाब से 24 सीटें और जुड़ जातीं। यानी महाराष्ट्र से कुल 72 सांसद चुने जाते। इसी तरह उत्तर प्रदेश में सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाती। सुले ने आगे कहा, "इस फॉर्मूले से किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं हो रहा था, इसलिए सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत और ओवैसी ने इसे प्राथमिक तौर पर पसंद किया था। लेकिन सुले ने सरकार से कहा था कि वे अलग-अलग पार्टियों से बात करने के बजाय पूरे 'इंडिया' गठबंधन को एक साथ बुलाकर चर्चा करें।"

बिल से गायब हो गई '50% की शर्त'

सुप्रिया सुले ने बताया कि जब यह बिल असल में संसद में आया, तो विपक्ष हैरान रह गया क्योंकि उसमें '50% सीट बढ़ाने' का कोई जिक्र ही नहीं था। विपक्ष के हंगामा करने पर अमित शाह ने ऑन-रिकॉर्ड कहा था कि 'मैं यह शर्त जोड़ने के लिए तैयार हूँ, एक घंटे के लिए कार्यवाही रोककर संशोधन कर देता हूँ।' लेकिन सुले के मुताबिक, न तो कार्यवाही रुकी और न ही वह संशोधन आया। सुप्रिया सुले ने साफ कर दिया है कि जब तक 50% सीट बढ़ोतरी का लिखित प्रस्ताव नहीं मिलता और 'इंडिया' गठबंधन से चर्चा नहीं होती, तब तक NCP इस बिल को समर्थन नहीं देगी।

क्या होता है परिसीमन (Delimitation)?

परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के बदलाव के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण करना। देश में आबादी बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व असंतुलित हो गया है। सभी मतदाताओं को समान प्रतिनिधित्व मिले, यही इस प्रक्रिया का उद्देश्य है। फिलहाल लोकसभा में 543 चुनी हुई सीटें हैं।

मोदी सरकार के लिए क्यों अहम है यह बिल?

परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होती है, जिसके लिए संसद में विशेष बहुमत (Special Majority) आवश्यक है। ऐसे में सिर्फ सत्ताधारी गठबंधन का बहुमत काफी नहीं होता और विपक्षी दलों का समर्थन बेहद निर्णायक हो जाता है। आगामी मानसून सत्र में अगर यह बिल आता है, तो 'इंडिया' गठबंधन की भूमिका सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।