नागपुर से किसकी लगेगी लॉटरी? दयाशंकर तिवारी और राजीव पोद्दार सबसे आगे; पार्टी देगी मौका या फिर बढ़ेगा इंतजार
नागपुर: केंद्रीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने महाराष्ट्र विधान परिषद (Maharashtra Legislative Council) की 17 सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसमें नागपुर जिले (Nagpur District) की एक अहम सीट भी शामिल है। चुनाव का ऐलान होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सबसे ज्यादा नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले उपचुनाव में भाजपा (Bhartiya Janta Party) किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी। नागपुर से भाजपा के मौजूदा शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी (Dayashankar Tiwari) और वरिष्ठ नेता राजीव पोद्दार (Rajiv Poddar) का नाम एक बार फिर चर्चाओं में है। हालांकि, इससे भी बड़ी चर्चा इस बात की है कि पार्टी इन चर्चित चेहरों में से किसी एक पर भरोसा जताएगी या फिर पिछली बार की तरह किसी ऐसे नाम को आगे कर देगी, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी।
17 सीटों पर 18 जून को मतदान
महाराष्ट्र विधान परिषद की खाली 17 सीटों पर चुनाव का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 18 जून को मतदान कराया जाएगा, जबकि 22 जून को मतगणना होगी। इन 17 सीटों में एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल है, जिस पर अब सबसे ज्यादा नजरें नागपुर की सियासत पर टिकी हुई हैं। नागपुर जिले की जिस सीट पर उपचुनाव हो रहा है, उस सीट से पहले राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले विधान परिषद सदस्य थे। हालांकि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें उनकी पारंपरिक कामठी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने बड़ी जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद बावनकुले ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब उसी खाली हुई सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
दयाशंकर तिवार, राजीव पोद्दार कद्द्वार नेता
राजस्व मंत्री बावनकुले के इस्तीफे से खाली हुई सीट को लेकर भाजपा में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर टिकट के लिए नेताओं की सिफारिशें भी शुरू हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें भाजपा के मौजूदा शहर अध्यक्ष और पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी तथा वरिष्ठ नेता डॉ. राजीव पोद्दार प्रमुख माने जा रहे हैं। दोनों नेताओं को संगठन में मजबूत पकड़ वाला चेहरा माना जाता है। हाल ही में हुए नगर परिषद, नगर पंचायत और नागपुर महानगरपालिका चुनावों में भाजपा ने इन्हीं नेताओं की अगुवाई में चुनाव लड़ा और प्रचंड जीत हासिल की थी।
फिर दोहराया जायेगा या मिलेगा मौका
दोनों नेताओं की मेहनत और संगठन में सक्रिय भूमिका के बाद समर्थकों के बीच यह चर्चा लगातार तेज हो रही है कि जल्द ही इनमें से कोई एक नेता विधान परिषद में दिखाई दे सकता है। हालांकि, पिछली बार भी दोनों नेताओं के नामों की चर्चा जोरदार तरीके से चली थी, लेकिन पार्टी ने अंततः वरिष्ठ नेता संजय भेंडे को उम्मीदवार बनाया था। अब एक बार फिर चुनाव की घोषणा के साथ दोनों नाम सुर्खियों में हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा संगठन में लंबे समय से काम कर रहे इन नेताओं में से किसी एक को मौका देगी या फिर पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी।
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