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Yavatmal

Yavatmal: प्राकृतिक खेती में असाधारण योगदान देने वाले सुभाष शर्मा को 'पद्मश्री पुरस्कार' देने की घोषणा, यवतमाल जिले को पहली बार मिला ये सम्मान


यवतमाल: प्राकृतिक खेती के समर्थक, प्रशिक्षक, चिकित्सक और दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान द्वारा संचालित दीनदयाल प्रबोधिनी के अध्यक्ष यवतमाल के सुभाष शर्मा को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी की रात को केंद्र सरकार की वेबसाइट पर पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची की घोषणा की गई। सुभाष शर्मा के रूप में यवतमाल जिले को पहली बार यह सम्मान मिल रहा है।

वह पिछले 30 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनकी प्रेरणा से देशभर में हजारों किसान विषमुक्त प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। यवतमाल के पास तिवसा में उनका 20 एकड़ का खेत एक प्राकृतिक कृषि प्रयोगशाला है। इस कृषि में, उन्होंने रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का उपयोग किए बिना केवल देशी गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक आदानों का उपयोग करके प्रचुर मात्रा में उत्पादन करने की कीमिया हासिल की है। अब तक लाखों किसान उनके खेतों में जाकर प्रशिक्षण ले चुके हैं। सुभाष शर्मा ने भारत के कई कृषि विश्वविद्यालयों में भी व्याख्यान दिया है।

सुभाष शर्मा के कृषि प्रयोगों और इस क्षेत्र में उनके असाधारण कार्यों के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार के 'कृषिभूषण' पुरस्कार, एग्रोवन के 'स्मार्ट किसान' पुरस्कार, दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान के 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा पुरस्कार' आदि से सम्मानित किया जा चुका है। 

किसानों की आत्महत्या के लिए मशहूर यवतमाल जिले के सुभाष शर्मा को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा पर कृषि जगत से जुड़े लोग, सुभाष को उचित सम्मान दिए जाने की भावना व्यक्त कर खुश हैं। राजनीतिक नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे सभी क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने सुभाष शर्मा से मुलाकात की है और उन्हें बधाई दी है। किसानों ने भी भारत सरकार के इस फैसले पर अपनी खुशी व्यक्त की है।