Yavatmal: तेंदुए को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, हुई मौत
यवतमाल: नागपुर-तुलजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोसादानी घाट पर भोजन की तलाश में घूम रहे एक तेंदुए को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में तेंदुए की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना बुधवार रात करीब 10:30 बजे अरनी तहसील के कोसादानी घाट पर घटी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, जांच की और मृत तेंदुए को आर्णी स्थित वन रेंज कार्यालय ले आए।
लगभग चार से पांच साल का एक तेंदुआ उत्तरी आर्नी क्षेत्र के लोनबेहाल बिट सेल नंबर 11 में घूम रहा था। जब वह सड़क पार कर रहे थे, तो नागपुर-तुलजापुर राजमार्ग पर एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तेंदुआ मौके पर ही मर गया।
घटना की जानकारी मिलने पर सहायक वन संरक्षक दादासाहेब तौर, वन परिक्षेत्र अधिकारी नितिन वानखड़े, परिक्षेत्र सहायक विश्वम्भर जाधव, वन संरक्षक गौतम बर्डे, नीलेश चव्हाण, आकाश मोरे, उद्धव बुद्धवंत, लक्ष्मण भिसे, पुंडलिक खत्री, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण आडे, पुलिस अधिकारी अतुल पवार, जमादार अरुण पवार, मानद वन्यप्राणी रेंजर श्याम जोशी, वन रेंजर सतीश इंगोले, विनोद मस्के, मयूर पालेकर, संतोष राठोड, संजय माहुरकर, प्रदीप भीमटे, कामेश भोयर, अतुल येनेवार, रामकृष्ण लांडे, पुलिस पाटिल लोनबेहाल के सरपंच मौके पर पहुंचे।
वन अधिकारियों ने शव का पोस्टमार्टम किया और मृत तेंदुए के शव को आर्णी वन विभाग कार्यालय भेज दिया। नागपुर-तुलजापुर राजमार्ग पर कोसाडानी घाट में पहले भी दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। चूंकि सड़क के दोनों ओर जंगल हैं, इसलिए वहां बाघ, तेंदुए, भालू, लोमड़ी, हिरण आदि जैसे जंगली जानवरों की बड़ी आबादी रहती है। हालांकि, ये जंगली जानवर रात में सड़क पार करते समय तेज गति से चलने वाले वाहनों की चपेट में आकर मारे जा रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों ने नागपुर-तुलजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर समृद्धि राजमार्ग की तरह वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक गलियारा बनाने की मांग की है।
'बंद कमरे में' शव परीक्षण
भोजन की तलाश में घूम रहे एक तेंदुए को बुधवार रात कोसाडानी घाट पर अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में युवा तेंदुए की मौत हो गई। आज गुरुवार को पंचनामा कार्रवाई के बाद पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेहरा और डॉ. अरुण अडे ने मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद लोनबेहाल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। यह पूरी प्रक्रिया 'बंद कमरे में' संपन्न हुई। यह कार्रवाई यवतमाल वन विभाग के उप वनसंरक्षक धनंजय वैभासे के मार्गदर्शन में की गई।
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