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Akola

Akola: जलवायु परिवर्तन और वन्यजीवों के कारण किसान कर रहे हैं पारंपरिक फसलों की ओर रुख


अकोला: पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण में हो रहे बदलाव के कारण क्षेत्र में जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे मूंग, उदीद, ज्वार, तिल बाजरा, भडली जैसी पारंपरिक फसलें, जिनकी खेती पीढ़ियों से की जा रही थी, लुप्त हो गई हैं और इन फसलों की खेती के क्षेत्र में भारी कमी आई थी। लेकिन अब फिर से किसान पारंपरिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.  

खरीफ सीजन में मूंग और उदीद की फसल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही थी। अत: किसानों की वार्षिक वित्तीय योजना निम्नलिखित फसलों, कपास और सोयाबीन पर निर्भर करती थी। इन दो मुख्य फसलों के उत्पादन से प्राप्त धन से परिवार के लड़के-लड़कियों की शिक्षा, अस्पताल तथा विवाह आदि कार्य सम्पन्न होते थे।

हाल के दिनों में जंगली जानवरों की संख्या में भारी वृद्धि के कारण होने वाली समस्याओं से किसान निपटने में असमर्थ हैं। वहीं, पर्यावरण में बदलाव के कारण किसान पारंपरिक फसलों से मुंह मोड़ रहे हैं क्योंकि ज्वार, बाजरी, मूंग, उड़द, तिल आदि फसलों से उन्हें ज्यादा आय नहीं मिल रही है।

पहले मूंग, उदीद और ज्वार जैसी फसलों की खेती हजारों हेक्टेयर भूमि पर होती थी। लेकिन दिन-ब-दिन किसानों ने उपरोक्त फसलों की खेती से मुंह मोड़ लिया है और इस वर्ष तालुका में उदीद 315 हेक्टेयर, मूंग 320 हेक्टेयर और ज्वार केवल 77 हेक्टेयर ही किसानों ने बोई है।