logo_banner
Breaking
  • ⁕ विधानसभा में गूंजा बीडीपेठ डीपी रोड अतिक्रमण और रिंगरोड मटन मार्किट का मुद्दा, विधायक मोहन मते ने राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: घर से 40 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त, एलसीबी और आपूर्ति विभाग की संयुक्त कार्रवाई ⁕
  • ⁕ लगातार दूसरे दिन देश में सबसे गर्म रहा अमरावती जिला, तापमान 41.8 डिग्री हुआ दर्ज; विदर्भ के छह जिलों में 40 पार तापमान ⁕
  • ⁕ Amravati: एनएचएम में फंड संकट: दो महीने से वेतन नहीं, स्वास्थ्य योजनाओं पर भी मंडरा रहा खतरा ⁕
  • ⁕ Nagpur: एमडी ड्रग्स तस्करी का पर्दाफाश, पाचपावली पुलिस की कार्रवाई; दो आरोपी गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Nagpur: अफवाह ने बढ़ाया बवाल, हिंगणा में ‘बच्चा चोरी’ के शक में बुजुर्ग महिला से मारपीट ⁕
  • ⁕ मराठी भाषा नहीं पढ़ना स्कूलों को पड़ेगा भारी, ऐसे स्कूलों की मान्यता होगी रद्द; मंत्री दादा भूसे का ऐलान ⁕
  • ⁕ Ramtek: नवरगांव स्थित टूरिस्ट ढ़ाबा के कुक की छह माह बाद मिली लाश, पुलिस ने ढ़ाबे के 4 कर्मचारियों को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Wardha: आपूर्ति विभाग की बड़ी कार्रवाई, हजारों टन अवैध गेहूं-चावल जब्त, बजरंग दल की सतर्कता से गोदाम सील ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Akola

Akola: जलवायु परिवर्तन और वन्यजीवों के कारण किसान कर रहे हैं पारंपरिक फसलों की ओर रुख


अकोला: पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण में हो रहे बदलाव के कारण क्षेत्र में जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे मूंग, उदीद, ज्वार, तिल बाजरा, भडली जैसी पारंपरिक फसलें, जिनकी खेती पीढ़ियों से की जा रही थी, लुप्त हो गई हैं और इन फसलों की खेती के क्षेत्र में भारी कमी आई थी। लेकिन अब फिर से किसान पारंपरिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.  

खरीफ सीजन में मूंग और उदीद की फसल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही थी। अत: किसानों की वार्षिक वित्तीय योजना निम्नलिखित फसलों, कपास और सोयाबीन पर निर्भर करती थी। इन दो मुख्य फसलों के उत्पादन से प्राप्त धन से परिवार के लड़के-लड़कियों की शिक्षा, अस्पताल तथा विवाह आदि कार्य सम्पन्न होते थे।

हाल के दिनों में जंगली जानवरों की संख्या में भारी वृद्धि के कारण होने वाली समस्याओं से किसान निपटने में असमर्थ हैं। वहीं, पर्यावरण में बदलाव के कारण किसान पारंपरिक फसलों से मुंह मोड़ रहे हैं क्योंकि ज्वार, बाजरी, मूंग, उड़द, तिल आदि फसलों से उन्हें ज्यादा आय नहीं मिल रही है।

पहले मूंग, उदीद और ज्वार जैसी फसलों की खेती हजारों हेक्टेयर भूमि पर होती थी। लेकिन दिन-ब-दिन किसानों ने उपरोक्त फसलों की खेती से मुंह मोड़ लिया है और इस वर्ष तालुका में उदीद 315 हेक्टेयर, मूंग 320 हेक्टेयर और ज्वार केवल 77 हेक्टेयर ही किसानों ने बोई है।