Bhandara: एल नीनो के खतरे के बीच भंडारा के किसानों का बड़ा फैसला; मानसून में देरी से निपटने के लिए बदली पीक पद्धति, 'DSR' और 'SRT' तकनीक का सहारा
भंडारा: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा इस साल एल नीनो (El Niño) के प्रभाव के चलते मानसून में देरी और बेरुखी की आशंका जताए जाने के बाद, भंडारा जिले के अन्नदाता ने इस प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। भंडारा जिले की मुख्य फसल 'धान' (चावल) की बुवाई और रोपाई का समय बेहद नजदीक आ चुका है, लेकिन पारंपरिक खेती में ज्यादा पानी की जरूरत होती है। बदलते मौसम चक्र और पानी की संभावित किल्लत को देखते हुए भंडारा के किसानों ने अपनी पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलते हुए 'कम पानी में अधिक उत्पादन' देने वाली आधुनिक पीक पद्धतियों को अपनाना शुरू कर दिया है।
इस संकट की घड़ी में किसानों का संबल बनने के लिए भंडारा जिले का कृषि विभाग भी पूरी तरह एक्टिव मोड पर आ गया है। कृषि विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ खुद दफ्तरों से निकलकर सीधे किसानों के बांध (खेतों की मेड़) पर पहुंच रहे हैं। विभाग की ओर से खेतों में ही किसानों को कम पानी में धान की अच्छी पैदावार लेने के लिए DSR (Direct Seeded Rice - सीधे धान बुवाई) और SRT (Saguna Rice Technique - सगुणा राइस तकनीक) जैसी आधुनिक पद्धतियों का लाइव डेमो और प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते परिवेश और अनियमित बारिश के दौर में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए इन नई तकनीकों का सहारा लेना बेहद जरूरी हो गया है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल पानी की भारी बचत होती है, बल्कि मजदूरी और लागत में भी कमी आती है। संकट के इस दौर में कृषि विभाग का यह 'बांधावर मार्गदर्शन' (खेतों पर मार्गदर्शन) भंडारा के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है और किसान भी उत्साह के साथ इस बदलाव को स्वीकार कर रहे हैं।
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