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Bhandara

जब स्कूल पहुंचा जिला परिषद... शिक्षक नहीं मिले तो बच्चों ने शिक्षा विभाग को ही बना दिया क्लासरूम


भंडारा:  हाथों में कॉपी... पेन... किताबें... सामने बैठे मासूम बच्चे... लेकिन यह कोई स्कूल नहीं, बल्कि जिला परिषद के शिक्षा विभाग का बरामदा था। भंडारा जिले से शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाली तस्वीर सामने आई है। मोहाड़ी तहसील के सोरणा गांव की जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं होने से नाराज छात्र, अभिभावक और ग्रामीण सीधे जिला परिषद कार्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने शिक्षा विभाग के बाहर ही बच्चों की कक्षा लगाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।

44 बच्चों का भविष्य अधर में
सोरणा की जिला परिषद स्कूल में पहली से चौथी तक 44 छात्र पढ़ते हैं। लेकिन स्कूल में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। नतीजा यह कि कई दिनों से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग से शिक्षक नियुक्त करने की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ यही जवाब मिला कि "जिले में शिक्षकों की कमी है।"

बच्चों ने पढ़ाई से दिया जवाब
लगातार अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने इस बार विरोध का अलग रास्ता चुना। वे बच्चों को लेकर सीधे जिला परिषद पहुंचे और शिक्षा विभाग के बरामदे को ही क्लासरूम बना दिया। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने लगे, जबकि अभिभावकों ने अधिकारियों से पूछा, "जब स्कूल में शिक्षक नहीं हैं, तो हमारे बच्चे पढ़ें कहाँ?" यह दृश्य देखते ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

आश्वासन मिला, भरोसा नहीं
अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर जल्द शिक्षक नियुक्त करने का भरोसा दिया। लेकिन ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब वे केवल वादों पर विश्वास नहीं करेंगे। यदि जल्द नियुक्ति नहीं हुई तो जिला परिषद कार्यालय के सामने उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

सिर्फ आंदोलन नहीं, व्यवस्था पर सवाल
यह प्रदर्शन केवल शिक्षक की मांग नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हकीकत को सामने लाने वाला संदेश है। शिक्षा का अधिकार कानून हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देता है, लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो यह अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या प्रशासन बच्चों को शिक्षक देगा या फिर अगली कक्षा भी जिला परिषद के बरामदे में ही लगेगी?